सबरीमाला में ‘श्रद्धा पर हाथ साफ’! अब ED ने संभाली कमान

संजीव पॉल
संजीव पॉल

केरल का सबरीमाला अयप्पा मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। लेकिन अब वही मंदिर सोना चोरी, प्रशासनिक लापरवाही और कथित साजिशों के कारण देश की सबसे संवेदनशील जांचों में शामिल हो चुका है। मामला इतना गंभीर हो गया कि अब इसमें Enforcement Directorate (ED) की एंट्री हो चुकी है।

ED की एंट्री: जब आस्था के मामले में पैसा दिखने लगे

जैसे ही जांच में पैसों और लेन-देन की गंध आई, वैसे ही ED ने कमान संभाल ली। ED इस वक्त केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में करीब 21 ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।
मामला PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत दर्ज किया गया है, यानी अब यह सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि money trail की जांच भी है।

विधानसभा में हंगामा, कोर्ट में सख्ती

इस विवाद की चिंगारी सबसे पहले केरल विधानसभा में भड़की। विपक्ष ने सरकार और सरकार ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) पर
उंगलियां उठाईं। मामला बढ़ता गया और आखिरकार केरल हाई कोर्ट तक पहुंचा।

हाई कोर्ट ने साफ कहा— “आस्था का मामला है, लेकिन जांच में आस्था से ज्यादा तथ्य बोलेंगे।”

इसके बाद Special Investigation Team (SIT) बनाई गई।

SIT रिपोर्ट: मंदिर में गड़बड़ी, सिर्फ शक नहीं हकीकत

SIT की रिपोर्ट ने कई लोगों की नींद उड़ा दी। रिपोर्ट में माना गया कि मंदिर में सोने की हेराफेरी हुई है। जांच के दौरान मंदिर के मुख्य पुजारी कंदारारू राजीवारू की गिरफ्तारी हुई। अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

यानी मामला “गलती” से निकलकर अब “सिस्टमेटिक गड़बड़ी” की तरफ बढ़ चुका है।

सोना कहां गया? अब सन्निधानम में माप-तौल

हाल ही में SIT की टीम सबरीमाला के सन्निधानम पहुंची। यहां— सोने की प्लेटिंग की मोटाई नापी जा रही है। सैंपल लिए जा रहे हैं। द्वारपालक मूर्तियों और दरवाजों की जांच हो रही है।

यह सब कुछ हाई कोर्ट की अनुमति से किया जा रहा है, ताकि बाद में कोई यह न कह सके— “सबूत से ज्यादा भावना देखी गई।”

1998 का दान, 2025 की जांच

इस पूरे विवाद की जड़ें जाती हैं 1998 तक। उस वक्त— उद्योगपति विजय माल्या ने 30.3 किलो सोना और 1900 किलो तांबा मंदिर के लिए दान किया था। लेकिन जब सालों बाद रिकॉर्ड और हकीकत की तुलना हुई, तो सोने की मात्रा में फर्क दिखा।

यहीं से सवाल उठा— सोना घिसा या गायब?

चार चरणों में खुल रही परतें

जांच एजेंसियां इस केस को एक-एक लेयर में खोल रही हैं—

Phase 1

श्रीकोविल और सजावटी संरचनाओं की जांच

Phase 2

2019 में बदले गए सोने के दरवाजों का ऑडिट

Phase 3

द्वारपालक मूर्तियों और फ्रेम से हटाई गई परत

Phase 4

2025 तक की सभी gold-related transactions

सिर्फ चोरी नहीं, भरोसे का संकट

जांच में जो सबसे गंभीर बात सामने आ रही है, वह यह है कि जिनके हाथ में सुरक्षा थी उन्हीं के हाथों से हेराफेरी हुई। यह मामला अब मंदिर प्रबंधन, सरकारी निगरानी और धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही तीनों पर सवाल खड़े कर रहा है।

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