
भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में इस बार परेड से ज़्यादा चर्चा कुर्सियों की कतार को लेकर हो रही है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया है कि उन्हें और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी को तीसरी पंक्ति में बैठाकर जानबूझकर अपमानित किया गया.
खरगे का दावा है कि न सिर्फ उन्हें अपेक्षित सीट नहीं मिली, बल्कि उन्हें अपने सचिवों को भेजकर सीट और पास की व्यवस्था करानी पड़ी. राजनीति में जहां symbolism सब कुछ होता है, वहां “थर्ड रो” सिर्फ एक लाइन नहीं, बल्कि संदेश बन जाती है.
“हम सीनियर हैं, बच्चे नहीं” – खरगे का सीधा हमला
ANI से बातचीत में खरगे ने साफ कहा, “मैं सीनियर मोस्ट लीडर हूं. राहुल गांधी और मेरे पास कैबिनेट रैंक है, फिर भी हमें तीसरी लाइन में बैठाया गया, जहां राज्य मंत्री और बच्चे थे.”
इस बयान के बाद कांग्रेस ने इसे सिर्फ व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि संविधान और विपक्ष की गरिमा पर हमला बताया. पार्टी का कहना है कि यह सत्ता की उस मानसिकता को दर्शाता है, जिसमें विपक्ष को ceremonial space में भी second-class treatment दिया जाता है.
सरकार की सफाई: “सब कुछ Table of Precedence के मुताबिक”
विवाद बढ़ने पर रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि बैठने की व्यवस्था Table of Precedence के अनुसार की गई थी. सरकार का तर्क है कि खरगे की उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए विशेष सुविधा दी गई, न कि अपमान.
सरकार के मुताबिक, “यह आयोजन प्रोटोकॉल आधारित होता है, पॉलिटिकल पसंद-नापसंद पर नहीं.”
लेकिन राजनीति में दिक्कत यही है—जो लिखा होता है, वह हमेशा जो दिखता है वैसा नहीं होता.
छुपा Soft Ego War
यह विवाद सिर्फ कुर्सी का नहीं, control of narrative का है. सत्ता कहती है—“यह नियम है”, विपक्ष कहता है—“यह संदेश है”.

सवाल यह नहीं कि तीसरी पंक्ति गलत थी या सही, सवाल यह है कि क्या विपक्ष के शीर्ष नेताओं को visibly sidelined दिखाया गया?
गणतंत्र दिवस जैसे मौके पर seating सिर्फ logistics नहीं, बल्कि लोकतंत्र की optics होती है.
First Row Democracy, Third Row Opposition?
आज की राजनीति में ऐसा लगता है कि
- First Row = Loyal Democracy
- Second Row = Adjustable Allies
- Third Row = Question पूछने की सज़ा
अगर कुर्सियां बोल सकतीं, तो शायद कहतीं— “यह Republic Day है, लेकिन seating अभी भी Rajadhani style है.”
Ceremony छोटी, Symbolism बड़ा
खरगे और राहुल गांधी देश के दो सबसे बड़े विपक्षी पदों पर हैं. ऐसे में यह विवाद सिर्फ कांग्रेस बनाम सरकार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सम्मान बनाम सत्ता की संवेदनशीलता का टेस्ट है.
Republic Day पर असली सवाल यही है— क्या लोकतंत्र सिर्फ परेड में दिखता है, या पंक्तियों में भी?
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