
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को राजस्थान के जैसलमेर में स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में सह-पायलट के तौर पर उड़ान भरकर इतिहास रच दिया। भारत-पाकिस्तान सीमा के करीब यह उड़ान सिर्फ एक प्रोटोकॉल विज़िट नहीं थी यह एक सशक्त संदेश भी था।
क्या है ‘प्रचंड’ और क्यों है खास?
Hindustan Aeronautics Limited द्वारा डिजाइन और विकसित एलसीएच ‘प्रचंड’ भारत का पहला स्वदेशी अटैक हेलीकॉप्टर है, जिसे हाई-एल्टीट्यूड वॉरफेयर के लिए तैयार किया गया है। इस हेलीकॉप्टर ने Indian Air Force स्टेशन, जैसलमेर से उड़ान भरी।
जैतून हरे रंग की फ्लाइट सूट और हेलमेट में राष्ट्रपति ने कॉकपिट से हाथ हिलाकर अभिवादन किया एक तस्वीर, जिसने “Commander-in-Chief in Action” का नैरेटिव बना दिया।
सिर्फ उड़ान नहीं, एक स्ट्रैटेजिक सिग्नल
सीमा के पास ‘प्रचंड’ में राष्ट्रपति की मौजूदगी को डिफेंस एक्सपर्ट्स प्रतीकात्मक और स्ट्रैटेजिक दोनों मान रहे हैं। यह वही रेगिस्तानी इलाका है, जहां वायुसेना का बड़ा अभ्यास आयोजित होता है। ऐसे समय में राष्ट्रपति की उड़ान ने “Make in India” और “Nari Shakti in Uniform” दोनों को एक फ्रेम में ला खड़ा किया।
जब ‘Commander’ खुद कॉकपिट में हो
भारत में अक्सर रक्षा उपकरणों की खरीद पर बहस होती रही है इंपोर्ट बनाम इंडिजिनस। लेकिन इस उड़ान ने बहस से ज्यादा भरोसा दिखाया। सवाल ये नहीं कि राष्ट्रपति ने उड़ान भरी। असली मैसेज ये है कि देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद भी स्वदेशी तकनीक पर भरोसा जता रहा है।

सीमा के उस पार शायद रडार ने सिर्फ एक हेलीकॉप्टर पकड़ा हो, लेकिन भारत ने एक तस्वीर दर्ज कर ली—“Confidence at 10,000 feet.”
क्यों है यह ऐतिहासिक?
पहली बार किसी भारतीय राष्ट्रपति ने स्वदेशी लड़ाकू हेलीकॉप्टर में सह-पायलट के रूप में उड़ान भरी। हाई-सिक्योरिटी बॉर्डर ज़ोन में सैन्य अभ्यास के दौरान भागीदारी। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत का प्रतीकात्मक प्रदर्शन।
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