मेरठ से नमो मंत्र- “लटकने-अटकने-भटकने” का दौर खत्म हो चुका

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

मेरठ ने आज इतिहास और हाई-टेक भविष्य को एक साथ देखा। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने बटन दबाकर ‘नमो भारत’ रैपिड रेल और मेरठ मेट्रो को राष्ट्र को समर्पित किया तो पूरा मैदान तालियों की गूंज से भर उठा।

यह सिर्फ एक Transport Project Launch नहीं था यह उस narrative का प्रदर्शन था जिसमें उत्तर प्रदेश खुद को नई रफ्तार वाले राज्य के रूप में पेश कर रहा है।

“25 शहरों में मेट्रो” – आंकड़ों से राजनीति

जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि एक दशक पहले मेट्रो कुछ गिने-चुने शहरों तक सीमित थी, लेकिन आज 25 शहरों में मेट्रो नेटवर्क सक्रिय है।

उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी सरकार ने जाम, प्रदूषण और धीमी कनेक्टिविटी की समस्या को मिशन मोड में लिया है।

संदेश साफ था “Infrastructure is the new politics.”

दिल्ली-मेरठ दूरी अब मिनटों की बात

दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर, जिसे National Capital Region Transport Corporation (NCRTC) विकसित कर रही है, अब क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की तस्वीर बदलने जा रहा है।

  1. मेरठ से दिल्ली सफर लगभग 55 मिनट
  2. शहर के भीतर मेरठ मेट्रो से लोकल ट्रैफिक राहत
  3. हाई-स्पीड, एयर-कंडीशंड, डिजिटल सुविधाओं से लैस ट्रेन

अब सफर सिर्फ दूरी तय करना नहीं, बल्कि अनुभव बन सकता है।

सपा-कांग्रेस पर सीधा वार

मेरठ से अपने पुराने चुनावी रिश्ते का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने विपक्षी दलों — सपा और कांग्रेस — पर “नकारात्मक राजनीति” का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि 2014, 2019 और 2024 में मेरठ की जनता ने उन्हें आशीर्वाद दिया और विकास के रास्ते को चुना। राजनीतिक मंच से यह स्पष्ट संकेत था कि 2027 की तैयारी भी अब Development Narrative के साथ ही होगी।

अब भाषणों में ब्रेक कम और रफ्तार ज्यादा है।

‘नारी शक्ति’ और समय पर Delivery Model

प्रधानमंत्री ने इस प्रोजेक्ट को नारी शक्ति से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि आधुनिक रेल संचालन में महिलाओं की भूमिका बढ़ रही है और यह नए भारत की पहचान है।

साथ ही उन्होंने अपनी सरकार की कार्यशैली का जिक्र करते हुए कहा कि “लटकने-अटकने-भटकने” का दौर खत्म हो चुका है। राजनीतिक संदेश स्पष्ट था शिलान्यास से लोकार्पण तक की दूरी अब कम हो चुकी है।

विकास बनाम विमर्श

मेरठ मेट्रो और नमो भारत का उद्घाटन केवल परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि एक चुनावी और आर्थिक संकेत भी है।

  1. Real Estate Momentum
  2. Industrial Investment
  3. Daily Commuter Economy Growth
  4. Western UP Political Consolidation

सवाल बस इतना है क्या रफ्तार सिर्फ ट्रैक पर दिखेगी या जमीन पर भी?

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