
दक्षिण एशिया की भू-राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। Pakistan और Afghanistan के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने हालात को खुली जंग के मुहाने पर ला खड़ा किया है।
एक तरफ पाकिस्तान का दावा एयरस्ट्राइक में 72 तालिबानी ढेर। दूसरी तरफ अफगान पक्ष का दावा ड्रोन और जमीनी हमलों से 19 चौकियां कब्जे में। जंग में दावे भी हथियार होते हैं।
पाकिस्तान: स्ट्रक्चर्ड पावर + न्यूक्लियर डिटरेंस
Pakistan Army दुनिया की मजबूत सेनाओं में गिनी जाती है।
- 6.5 लाख सक्रिय सैनिक
- 170+ परमाणु वारहेड्स
- 6000+ बख्तरबंद वाहन
- 4600+ आर्टिलरी गन
न्यूक्लियर हथियार इसे “स्ट्रैटेजिक डिटरेंस” देते हैं मतलब, आखिरी दांव बहुत भारी है।
अफगानिस्तान: गुरिल्ला माइंडसेट + पहाड़ी बढ़त
Taliban के पास अनुमानित 1.7 से 2 लाख लड़ाके हैं। टेक्नोलॉजी कम, लेकिन “हिट एंड रन” में माहिर। पहाड़, लोकल सपोर्ट और घात लगाकर हमला ये उनकी असली ताकत है। इतिहास गवाह है, अफगान ज़मीन ने कई बड़ी ताकतों को थकाया है।
पाकिस्तान एयर फोर्स
Pakistan Air Force के पास लगभग 450 फाइटर जेट:
- F-16 Fighting Falcon
- JF-17 Thunder
- Dassault Mirage III
ये क्रॉस-बॉर्डर स्ट्राइक और प्रिसीजन बमबारी में सक्षम हैं।
तालिबान की एयर कैपेसिटी?
अमेरिकी वापसी के बाद कुछ हेलीकॉप्टर जैसे UH-60 Black Hawk और Mi-17 मिले, लेकिन मेंटेनेंस और स्पेयर पार्ट्स की कमी बड़ी बाधा है। फाइटर जेट? फिलहाल नहीं।
मिसाइल और डिफेंस सिस्टम
पाकिस्तान के पास बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल सिस्टम, लेयर्ड एयर डिफेंस मौजूद है। तालिबान के पास न एडवांस्ड मिसाइल शील्ड, न लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता।

सीधी भाषा में टेक्नोलॉजी मैचअप एकतरफा दिखता है।
लेकिन… जंग सिर्फ टेक्नोलॉजी से नहीं जीती जाती
तालिबान की रणनीति “क्लासिकल आर्मी vs नॉन-स्टेट वारफेयर” का केस स्टडी है। घात, ड्रोन से छोटे हमले, लोकल इंटेलिजेंस ये पारंपरिक सेना के लिए सिरदर्द बन सकते हैं।
पाकिस्तान के लिए बॉर्डर इलाका जटिल है लोकल आबादी, हथियारबंद ग्रुप और सीमित स्पष्ट रेखाएं।
इतिहास की सीख
अफगान सैन्य ढांचा कई बार टूटा और बना। 2001-2021 के बीच Afghan National Army को पश्चिमी देशों ने ट्रेन किया, लेकिन 2021 के बाद पूरा स्ट्रक्चर बिखर गया।
आज तालिबान नेतृत्व के अधीन नई सैन्य संरचना है कम संसाधन, लेकिन जमीनी अनुभव ज्यादा।
F-16 बनाम फ़ुर्ती
अगर यह पारंपरिक जंग हुई तो पाकिस्तान की बढ़त साफ दिखती है। अगर यह लंबा गुरिल्ला संघर्ष हुआ तो समीकरण जटिल हो सकते हैं। टेक्नोलॉजी आसमान जीत सकती है, लेकिन पहाड़ अक्सर धैर्य जीतते हैं। जंग का असली खतरा यह है कि बयानबाज़ी और दावे जमीनी सच्चाई से तेज दौड़ते हैं।
| क्षेत्र | बढ़त |
|---|---|
| न्यूक्लियर पावर | पाकिस्तान |
| एयर फोर्स | पाकिस्तान |
| पारंपरिक सेना | पाकिस्तान |
| गुरिल्ला वॉरफेयर | तालिबान |
| पहाड़ी टेरेन एडवांटेज | अफगानिस्तान |
अंत में, सवाल यह नहीं कि कौन ज्यादा ताकतवर है सवाल यह है कि कौन जंग को किस तरह लड़ता है।
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