ओमान: सोहार में 2 भारतीयों की मौत, 10 घायल, युद्ध की आग भारतीयों तक

हुसैन अफसर
हुसैन अफसर

मिडिल ईस्ट में चल रही जंग का धुआं अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहा. ओमान के शांत औद्योगिक शहर सोहार में अचानक आसमान से मौत उतरी और दो भारतीयों की जिंदगी खत्म हो गई.

ड्रोन के इस हमले ने एक बार फिर याद दिलाया कि जब दुनिया की ताकतें युद्ध का शतरंज खेलती हैं, तो मोहरे अक्सर वे लोग बनते हैं जो बस रोज़ी-रोटी कमाने घर से दूर निकले होते हैं.

ग्राउंड रिपोर्ट: सोहार की सुबह और मौत का ड्रोन

ओमान के औद्योगिक शहर Sohar में शुक्रवार की सुबह सामान्य लग रही थी. फैक्ट्रियां चल रही थीं, मजदूर अपनी शिफ्ट में पहुंच चुके थे और बंदरगाह के आसपास हलचल थी. लेकिन कुछ ही मिनटों में आसमान से आई एक तेज आवाज ने सब कुछ बदल दिया.

एक ड्रोन अल-अवाही इंडस्ट्रियल एरिया से टकराया और देखते ही देखते अफरा-तफरी मच गई. धमाके के बाद धुएं का गुबार उठा और आसपास मौजूद लोगों को समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या है.

इस हमले में दो भारतीय नागरिकों की मौत हो गई, जबकि 10 भारतीय घायल हो गए.

विदेश मंत्रालय का बयान

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि कुल 11 लोग घायल हुए, जिनमें 10 भारतीय नागरिक शामिल हैं.

विदेश मंत्रालय में खाड़ी मामलों के अतिरिक्त सचिव असीम आर. महाजन ने बताया कि घायलों में से पांच लोगों को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है, जबकि बाकी का इलाज जारी है.

भारत सरकार ने कहा है कि मस्कट में मौजूद भारतीय दूतावास लगातार ओमान के अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित भारतीयों को हर संभव मदद दी जा रही है.

ड्रोन ने सीधे औद्योगिक क्षेत्र को निशाना बनाया

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह ड्रोन अल-अवाही औद्योगिक क्षेत्र में आकर टकराया. ओमान की सरकारी समाचार एजेंसी के हवाले से बताया गया कि इस घटना में दो विदेशी नागरिकों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए.

हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि ड्रोन किसने लॉन्च किया था, लेकिन क्षेत्र में चल रहे सैन्य तनाव को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है.

मिडिल ईस्ट युद्ध का फैलता दायरा

पदमपति शर्मा का कहना है कि मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य टकराव अब सीधे नागरिक इलाकों और विदेशी कामगारों को प्रभावित करने लगा है. लाखों भारतीय काम करते हैं. ऐसे में हर नई सैन्य घटना भारत के लिए चिंता का कारण बन जाती है.

कूटनीतिक हलकों में इसे “Collateral Damage of Geopolitics” कहा जाता है, यानी बड़ी ताकतों की लड़ाई का असर उन लोगों पर पड़ता है जिनका उससे कोई लेना-देना नहीं होता.

असली सवाल: युद्ध किसकी जीत है?

यह सवाल अब फिर खड़ा हो गया है. जब मिसाइलें उड़ती हैं, ड्रोन गिरते हैं और शहरों में धमाके होते हैं, तब जीत का जश्न कौन मनाता है? और हार किसकी होती है? ज्यादातर मामलों में जवाब एक ही होता है हार हमेशा आम इंसान की होती है. ओमान की यह घटना उसी कड़वी सच्चाई का नया अध्याय है.

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