
ओडिशा की राजनीति में इस वक्त सन्नाटा नहीं… शोर है, और वो भी ऐसा जैसे बंद कमरे में अचानक बम फूट गया हो। राज्यसभा चुनाव में जो होना नहीं चाहिए था, वही हुआ। कांग्रेस के अपने विधायक ही ‘वोटिंग मशीन’ से निकलकर ‘राजनीतिक मिसाइल’ बन गए। और निशाना? अपनी ही पार्टी।
“अपनों का वार”: कांग्रेस के 3 विधायक बाहर
राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने बिना समय गंवाए तीन बड़े चेहरों पर कार्रवाई ठोक दी। Ramesh Jena, Dasharathi Gamang और Sophia Firdous को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
कारण सीधा है, लेकिन कहानी टेढ़ी। आरोप है कि इन विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर BJP समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार Dilip Ray को वोट दे दिया।
राजनीति में इसे “क्रॉस वोटिंग” कहा जाता है, लेकिन जमीन पर इसका मतलब होता है भरोसे की हत्या।
“मैदान में खेल पलट गया”: BJP की साइलेंट स्ट्राइक
ओडिशा में कुल 4 सीटों पर चुनाव था। समीकरण साफ था, लेकिन नतीजा धुंधला निकला। सूत्रों के मुताबिक, BJD के 8 और कांग्रेस के 3 विधायकों ने लाइन तोड़ दी। Naveen Patnaik की पार्टी BJD और कांग्रेस का गणित अचानक फेल हो गया, और BJP ने बिना शोर किए बाजी मार ली।
यह वो मैच था जहां स्कोरबोर्ड कुछ और कह रहा था, लेकिन अंदरखाने स्क्रिप्ट बदल चुकी थी।
“राजनीतिक एक्सपर्ट की नजर”: रूबी अरुण का तीखा विश्लेषण
राजनीतिक विश्लेषक Ruby Arun कहती हैं, “ये सिर्फ क्रॉस वोटिंग नहीं है, ये कांग्रेस के अंदर simmering rebellion का विस्फोट है। जब विधायक पार्टी से ज्यादा अपने ‘राजनीतिक भविष्य’ को वोट देने लगें, तो समझिए संगठन ICU में है।”
उनका तंज सीधा है, लेकिन असर गहरा।

“अनुशासन या डर?” PCC का बड़ा फैसला
Odisha Pradesh Congress Committee ने इस कार्रवाई को “अनुशासन बनाए रखने” का कदम बताया है। लेकिन सवाल उठता है, क्या ये अनुशासन है या डर का डैमेज कंट्रोल?
क्योंकि सच्चाई ये है कि जब पार्टी के भीतर दरार दिखने लगे, तो दीवारें ऊंची करने से ज्यादा जरूरी होता है नींव को ठीक करना।
“BJD पर खामोशी क्यों?”
जहां कांग्रेस ने तुरंत कार्रवाई कर दी, वहीं BJD की तरफ से अभी तक कोई बड़ा कदम सामने नहीं आया। क्या ये रणनीतिक चुप्पी है या अंदरखाने ‘सेटिंग’? राजनीति में खामोशी अक्सर सबसे तेज आवाज होती है।
“आगे क्या?” ओडिशा की राजनीति में तूफान
इस पूरे घटनाक्रम ने ओडिशा की राजनीति को हिला दिया है। कांग्रेस के लिए ये सिर्फ 3 विधायकों की विदाई नहीं, बल्कि credibility का सवाल बन गया है।
और BJP? वो मुस्कुरा रही है… बिना कुछ कहे।
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