दिल्ली की तरफ बढ़े Nitish! 13 अप्रैल को इस्तीफा, बिहार में सत्ता पलट तय?

Ajay Gupta
Ajay Gupta

बिहार की सियासत में अचानक सब कुछ बदलता दिख रहा है। सत्ता के सबसे अनुभवी खिलाड़ी Nitish Kumar अब पटना से दिल्ली की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। ये सिर्फ एक राजनीतिक शिफ्ट नहीं, बल्कि पूरे पावर स्ट्रक्चर को रीसेट करने वाला गेमचेंजर मूव माना जा रहा है।

पटना से दिल्ली: नई पारी की शुरुआत

सूत्रों के मुताबिक, Nitish Kumar 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं। इसके बाद वे संसद सत्र में हिस्सा लेकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराएंगे।

यह बदलाव साफ संकेत देता है कि अब उनका फोकस राज्य की बजाय नेशनल पॉलिटिक्स पर होगा—जहां महिला आरक्षण और सीट विस्तार जैसे बड़े विधेयकों पर उनकी भूमिका अहम हो सकती है।

13 अप्रैल: इस्तीफे का ‘टर्निंग पॉइंट’?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि 13 अप्रैल को वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। राज्यसभा की शपथ के बाद पटना लौटकर राज्यपाल को इस्तीफा सौंपना—यह पूरा घटनाक्रम एक प्री-प्लान्ड पावर ट्रांजिशन की तरफ इशारा करता है। हाल ही में विधान परिषद से इस्तीफा देना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

बिहार में सत्ता का नया चेहरा

अगर Nitish Kumar इस्तीफा देते हैं, तो बिहार की सत्ता का केंद्र बदलना तय है। इस रेस में Samrat Choudhary का नाम सबसे आगे चल रहा है, जिन्हें भाजपा का मजबूत चेहरा माना जा रहा है। बीजेपी इस बार सिर्फ साझेदार नहीं, बल्कि लीडिंग रोल में आने की रणनीति पर काम कर रही है।

जेडीयू की ‘पावर सेविंग’ स्ट्रैटेजी

हालांकि Janata Dal (United) पूरी तरह बैकफुट पर जाने के मूड में नहीं है। पार्टी डिप्टी सीएम और स्पीकर जैसे अहम पदों पर दावा बनाए रखना चाहती है, ताकि सत्ता में उसकी पकड़ बनी रहे। यानी खेल सिर्फ कुर्सी का नहीं, बल्कि इन्फ्लुएंस और कंट्रोल का है।

72 घंटे में बदल सकती है पूरी तस्वीर

13 से 16 अप्रैल के बीच बिहार में बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल सकता है। एक तरफ Nitish Kumar दिल्ली की राजनीति में एंट्री करेंगे, तो दूसरी ओर राज्य में बीजेपी के नेतृत्व वाली नई सरकार का रास्ता साफ हो सकता है। यह सिर्फ बदलाव नहीं, बल्कि बिहार की सियासत का नया अध्याय होगा।

‘किंग’ से ‘किंगमेकर’ की ओर?

सवाल अब यह है—क्या Nitish Kumar खुद सत्ता से दूर जाकर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा रोल निभाने की तैयारी कर रहे हैं? या यह एक ऐसा कदम है, जो उन्हें भविष्य में किंगमेकर की भूमिका में ला सकता है? बिहार की राजनीति फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ मोड में है—लेकिन इतना तय है कि आने वाले कुछ दिन इतिहास लिखने वाले हैं।

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