
हाथ जोड़े हुए 28 वर्षीय मयंगलाम्बम ऋषिकांत सिंह अपनी जान की भीख मांगते रहे। कुछ ही सेकंड बाद, विद्रोहियों ने उन्हें बेहद करीब से गोली मार दी। हत्या के बाद जारी किए गए वीडियो के साथ एक लाइन लिखी गई— “No peace. No popular government.” यानी संदेश साफ था: डर फैलाओ, शांति को मार दो।
Silent Video, Loud Message
बिना आवाज़ के वीडियो में रात का अंधेरा है। पहाड़ी किनारे एक खाली मैदान। घुटनों के बल बैठा युवक, जुड़े हुए हाथ, झुका सिर— फिर अचानक राइफल की चमक और सब खत्म। यह वारदात मणिपुर की राजधानी इंफाल से करीब 65 किलोमीटर दूर, चुराचांदपुर जिले में हुई।
कैमरा चलता रहा, सरकारें चलती रहीं—और इंसान मरता रहा।
Identity Angle: शादी भी बनी शक की वजह
ऋषिकांत की पत्नी कुकी समुदाय से हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ऋषिकांत मणिपुर के काकचिंग खुनौ (घाटी क्षेत्र) के निवासी थे और नेपाल में काम करते थे। वे छुट्टी पर घर आए थे।
सूत्रों का दावा है कि उनकी पत्नी ने Kuki National Organisation (KNO) से मिलने की अनुमति ली थी, लेकिन KNO ने अनुमति देने से इनकार किया, KNO ने हत्या में शामिल होने से भी इनकार किया। United Kuki National Army (UKNA) ने भी खुद को इस घटना से अलग बताया।
यानि लाश है, वीडियो है—लेकिन जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं।

Police Update: गांव में मिली लाश
पुलिस के अनुसार, ऋषिकांत का शव चुराचांदपुर जिले के एक गांव में मिला। रात करीब 1:30 बजे उन्हें स्थानीय अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
शांति वार्ता के बीच हिंसा क्यों?
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह हत्या सुनियोजित उकसावे का हिस्सा है। मकसद— जातीय तनाव को फिर भड़काना। जनता में डर पैदा करना। सरकार गठन और शांति प्रक्रिया को पटरी से उतारना। मई 2023 की हिंसा के बाद से कुकी और मैतेई समुदाय एक-दूसरे के इलाकों में नहीं जाते।
राज्य में फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू है— लेकिन ज़मीन पर शांति अब भी लापता है।
Manipur में सवाल जिंदा, जवाब मृत
यह हत्या सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं है। यह हत्या है— कानून के भरोसे की, शांति की कोशिशों की और उस सिस्टम की, जो वीडियो वायरल होने के बाद भी सिर्फ “स्थिति पर नजर” रखता है।
मणिपुर में गोलियां अब सिर्फ शरीर नहीं, राज्य की आत्मा को छलनी कर रही हैं।
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