अरुणाचल की लड़कियों से नस्लभेदी टिप्पणी: दिल्ली में फिर उठा ‘चिंकी’ विवाद

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

दक्षिण दिल्ली के Malviya Nagar में एक साधारण घरेलू विवाद ने राष्ट्रीय बहस का रूप ले लिया। तीन युवतियां, जो Arunachal Pradesh से हैं और दिल्ली में रहकर पढ़ाई व काम कर रही हैं, अपने फ्लैट में AC लगवा रही थीं। ड्रिलिंग के दौरान कुछ मिट्टी नीचे वाली बालकनी में गिर गई।

यहीं से बहस शुरू हुई, लेकिन जल्द ही बहस की भाषा गिरकर नस्लभेदी टिप्पणियों में बदल गई।

क्या हैं आरोप?

पीड़िताओं के अनुसार, नीचे रहने वाले दंपति ने उन्हें अपमानजनक और अश्लील शब्दों से संबोधित किया। कथित तौर पर “चिंकी”, “मोमो”, “चाउमिन”, “मसाज पार्लर वाली” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया।

यह सिर्फ गाली नहीं थी, बल्कि पहचान पर हमला था। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें आसपास के लोग दंपति को रोकने की कोशिश करते दिखते हैं, लेकिन बहसबाजी जारी रहती है।

पीड़िताओं ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई है। दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब कानूनी प्रक्रिया तय करेगी कि आरोपों की गंभीरता के आधार पर क्या धाराएं लगेंगी और आगे क्या कदम उठेंगे।

“यह सिर्फ तीन लड़कियों का मामला नहीं”

युवतियों का कहना है कि यह केवल उनका व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि पूरे नॉर्थ ईस्ट के सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। Arunachal Pradesh भारत का अभिन्न हिस्सा है। फिर भी महानगरों में नस्लभेदी शब्दों का इस्तेमाल आज भी एक कड़वी सच्चाई है।

देश के आठ नॉर्थ ईस्ट राज्यों के लोग अक्सर बाहरी पहचान की वजह से पूर्वाग्रह का सामना करते हैं।

Urban India की परीक्षा

दिल्ली जैसे महानगर, जो खुद को विविधता की राजधानी कहते हैं, वहां अगर पहचान पर चोट हो तो सवाल केवल कानून का नहीं, समाज के नजरिए का भी है।

AC की ड्रिलिंग से निकली मिट्टी तो झाड़ दी जाएगी। लेकिन मन में जमी सोच की धूल कब साफ होगी? यह घटना हमें याद दिलाती है कि ‘इंडिया’ केवल नक्शे पर नहीं, व्यवहार में भी एक होना चाहिए।

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