राफेल पर सवाल क्यों? मैक्रों बोले – इससे भारत बनेगा Super Strong

भोजराज नावानी
भोजराज नावानी

फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने भारत के साथ 114 राफेल लड़ाकू विमानों की मेगा डील का खुलकर बचाव किया है। दिल्ली में आयोजित ‘AI Impact Summit 2026’ के दौरान उन्होंने कहा कि इस समझौते की आलोचना समझ से परे है, क्योंकि यह भारत को सैन्य रूप से और अधिक सक्षम बनाएगा। मैक्रों का स्पष्ट संदेश था यह डील केवल हथियार खरीद नहीं, बल्कि एक “Strategic Investment” है।

3.25 लाख करोड़ की मेगा डील

सप्ताह भर पहले रक्षा मंत्री Rajnath Singh की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 114 राफेल विमानों की खरीद को मंजूरी दी थी।

करीब ₹3.25 लाख करोड़ की यह डील भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देती है। समझौते के तहत दोनों देश मिलकर भारत में इन विमानों का निर्माण करेंगे यानी “Make in India” को भी बढ़ावा।

आलोचना पर मैक्रों का जवाब

मैक्रों ने कहा, “मुझे समझ नहीं आता कि लोग इसकी आलोचना कैसे कर सकते हैं। यह आपके देश को मजबूत बनाता है, हमारे रणनीतिक संबंधों को गहरा करता है और भारत में अधिक नौकरियां पैदा करेगा।”

उनके बयान से साफ है कि फ्रांस इस डील को केवल रक्षा सौदा नहीं, बल्कि दीर्घकालिक साझेदारी के रूप में देख रहा है।

सिर्फ राफेल नहीं, और भी समझौते

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग यहीं तक सीमित नहीं है। ‘हैमर मिसाइल’ मैन्युफैक्चरिंग वेंचर, ‘H125 हेलीकॉप्टर’ की फाइनल असेंबली यूनिट। ये दोनों प्रोजेक्ट भारत में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं।

मैक्रों ने दोनों देशों के रिश्तों को “विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” बताया।

भारत-फ्रांस संबंध अब केवल रक्षा या व्यापार तक सीमित नहीं हैं — स्पेस, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक इसका विस्तार हो चुका है।

देश में जब भी बड़ी रक्षा डील होती है, बहस शुरू हो जाती है “कितना खर्च?” “किसे फायदा?”

इस बार फ्रांस का जवाब सीधा है “Security Upgrade + Employment Package!”

लेकिन असली टेस्ट तब होगा जब टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और लोकल प्रोडक्शन जमीनी स्तर पर दिखेगा।

भारत की ताकत कितनी बढ़ेगी?

114 अतिरिक्त राफेल जेट्स भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता, एयर डॉमिनेंस और मल्टी-रोल ऑपरेशनल पावर को काफी मजबूत कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह डील क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर भी असर डालेगी।

यह डील केवल रक्षा खरीद नहीं, बल्कि Geopolitical Signaling भी है। भारत और फ्रांस दोनों इसे “Win-Win” बता रहे हैं। अब निगाहें इस पर होंगी कि Implementation कितनी तेजी और पारदर्शिता से आगे बढ़ता है।

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