“स्कूल या शॉपिंग मॉल?” लखनऊ में फीस के खिलाफ फूटा गुस्सा

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

स्कूल जाना अब “पढ़ाई” से ज्यादा “EMI भरने जैसा” क्यों लगने लगा है? Lucknow में छात्रों ने यही सवाल सड़कों पर लाकर रख दिया— और सिस्टम को आईना दिखा दिया।

गांधी प्रतिमा के सामने ‘शिक्षा बनाम व्यापार’

Rashtriya Chhatra Panchayat के बैनर तले हजरतगंज स्थित GPO Park में गांधी प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन हुआ। यहां छात्र, अभिभावक और प्रतिनिधि एक ही मुद्दे पर एकजुट दिखे “शिक्षा सेवा है या बिजनेस?”

फीस का ‘फुल टॉर्चर पैकेज’

प्रदर्शनकारियों ने निजी स्कूलों पर गंभीर आरोप लगाए— मनमानी फीस वसूली। हर साल नई किताबें। हर साल नई ड्रेस यानी…बच्चा वही, क्लास वही…लेकिन खर्च हर साल “अपग्रेड”!

“मजबूरी का फायदा उठा रहे स्कूल”

Shivam Pandey (राष्ट्रीय अध्यक्ष) ने सीधे आरोप लगाए— शिक्षा के नाम पर “खुला व्यापार” अभिभावकों की मजबूरी का शोषण। उनका साफ संदेश— “अब ये खेल ज्यादा दिन नहीं चलेगा!”

छात्रों की बड़ी मांग: सख्त कानून लाओ

प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखीं— फीस रेगुलेशन पर सख्त कानून। हर साल किताब बदलने पर रोक। एनुअल चार्ज और छिपी फीस खत्म। मतलब साफ “रूल्स नहीं होंगे, तो रूलिंग भी नहीं चलेगी!”

चेतावनी: आंदोलन होगा और बड़ा

छात्र संगठन ने सरकार को सीधी चेतावनी दी— अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज होगा यानी…ये सिर्फ शुरुआत है— “एजुकेशन रिफॉर्म का ट्रेलर अभी बाकी है!”

आज हालात ऐसे हैं कि मिडिल क्लास परिवार दबाव में, बच्चों की पढ़ाई “लक्ज़री” बनती जा रही और स्कूल “ब्रांड” बनते जा रहे। तो सवाल उठता है क्या शिक्षा अब अधिकार नहीं, सिर्फ एक प्रोडक्ट बन गई है?

सड़कों पर उतरी ‘एजुकेशन की लड़ाई’

Lucknow का ये प्रदर्शन सिर्फ फीस का मुद्दा नहीं ये सिस्टम के खिलाफ गुस्सा है ये बदलाव की शुरुआत है और सबसे बड़ी बात अब माता-पिता चुप नहीं रहेंगे…और छात्र सिर्फ पढ़ेंगे नहीं, लड़ेंगे भी!

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