जब लखनऊ के नवाब भी बोले – गणपति बप्पा मोरया!

महिमा बाजपेई
महिमा बाजपेई

लखनऊ – ताज, तहज़ीब और टुंडे कबाब के लिए मशहूर — अब बप्पा की भक्ति से सराबोर हो गया है। गणेश चतुर्थी 2025 के शुभ अवसर पर लखनऊ के हर मोहल्ले, गली और कॉलोनी में गणपति बप्पा मोरया की गूंज सुनाई दे रही है।

लखनऊ की गलियों में नवाबी अंदाज़ वाला उत्सव

जहां एक ओर मुंबई और पुणे अपनी भव्य गणेश मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध हैं, वहीं लखनऊ का गणेशोत्सव अब ‘नवाबी स्टाइल’ में खास पहचान बना रहा है।

घर-घर विराजे श्री गणेश: श्रद्धा के संग संस्कृति का संगम

लखनऊ के केवल पंडाल ही नहीं, घर-घर में भी छोटे-छोटे गणेश जी की मूर्तियाँ स्थापित की गईं। घरों में बनी मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं को पारंपरिक ढंग से पूजा जा रहा है — दूर्वा, मोदक, और नवाबी शैली में भोग

यह नज़ारा इस बात का प्रतीक है कि धार्मिक भक्ति और सांस्कृतिक धरोहर एक-दूसरे के पूरक बन चुके हैं।

बप्पा के स्वागत में उठी ढोल की थाप

जैसे ही गणपति बप्पा का आगमन हुआ, लखनऊ की सड़कों पर ढोल, ताशा और भजन-कीर्तन की आवाज़ें गूंज उठीं। कई सांस्कृतिक समितियों ने शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया है, जिनमें बच्चों से लेकर बुज़ुर्ग तक शामिल हो रहे हैं।

इको-फ्रेंडली बप्पा: नवाबों के शहर की नई पहल

इस साल लखनऊवासियों ने पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इको-फ्रेंडली मूर्तियों और प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया है। घरों में पूजा के लिए मिट्टी के गणेश, और विसर्जन के लिए बकेट या कृत्रिम तालाब की व्यवस्था देखी जा रही है।

संप्रदाय से ऊपर भक्ति: हर मज़हब के लोगों ने बप्पा का किया स्वागत

लखनऊ की यही तो खूबी है! यहां हर धर्म के लोगों ने गणपति उत्सव में भागीदारी दिखाई। कई मुस्लिम परिवारों ने भी गणपति पंडालों में सहयोग किया, फूल चढ़ाए और मिठाइयाँ वितरित कीं। यह नवाबी तहज़ीब का वो रूप है, जो धर्म से नहीं, दिल से जुड़ता है।

सोशल मीडिया पर छाए लखनऊ के गणपति

लखनऊ के गणपति उत्सव की तस्वीरें Instagram, Facebook और Twitter पर वायरल हो रही हैं।

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