
सुबह की हल्की धूप, आसमान में नमाज़ की पुकार और लखनऊ की हवा में घुली एक खास रूहानी खामोशी। रमज़ान के आखिरी जुम्मे पर जब अलविदा की नमाज़ का वक्त आया, तो लखनऊ का ऐतिहासिक बड़ा इमामबाड़ा सिर्फ एक इमारत नहीं रहा। वह आस्था का ऐसा समंदर बन गया, जहां हजारों लोग एक साथ झुके, हाथ उठे और दुआ में सिर्फ एक ही बात थी मुल्क में अमन रहे, इंसानियत जिंदा रहे।
हजारों नमाज़ियों से भर गया इमामबाड़ा
रमज़ान के पाक महीने का आखिरी जुम्मा मुस्लिम समाज के लिए बेहद अहम माना जाता है। लखनऊ में इस मौके पर सुबह से ही नमाज़ियों का बड़ा इमामबाड़ा की ओर रुख शुरू हो गया था। जैसे-जैसे वक्त आगे बढ़ा, वैसे-वैसे इमामबाड़ा परिसर नमाज़ियों से भरता चला गया।
कुछ ही देर में हालात ऐसे हो गए कि अंदर की जगह कम पड़ने लगी।
कई लोगों ने इमामबाड़ा के बाहर सड़कों और खुले मैदानों में ही नमाज़ अदा की। लेकिन भीड़ के बावजूद माहौल में अनुशासन और इबादत की सादगी साफ दिखाई दे रही थी।
दुआओं में गूंजा भाईचारे का पैगाम
नमाज़ से पहले उलेमा ने रमज़ान की अहमियत पर खुत्बा दिया। उन्होंने रोज़े के असली मकसद को याद दिलाया— सब्र, इंसानियत और जरूरतमंदों की मदद।
खुत्बे में यह भी कहा गया कि रमज़ान सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह खुद को बेहतर इंसान बनाने का महीना है।
नमाज़ के बाद हजारों हाथ एक साथ उठे और दुआ की गई देश में अमन-चैन रहे, समाज में भाईचारा बना रहे, हर इंसान की जिंदगी में खुशहाली आए।

प्रशासन की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
इतनी बड़ी संख्या में नमाज़ियों के जुटने को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही खास इंतजाम किए थे। इमामबाड़ा परिसर और आसपास के इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया था। सुरक्षा के साथ-साथ ट्रैफिक व्यवस्था को भी व्यवस्थित रखने के लिए कई रास्तों पर यातायात डायवर्ट किया गया।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे ताकि किसी को भी परेशानी का सामना न करना पड़े।
नमाज़ के बाद गले मिलकर दी ईद की मुबारकबाद
अलविदा की नमाज़ खत्म होने के बाद माहौल में एक अलग ही अपनापन देखने को मिला। लोग एक-दूसरे से गले मिले, मुस्कुराए।
अब ईद की तैयारियों में जुटा शहर
अलविदा की नमाज़ के साथ ही रमज़ान का महीना अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुका है। लखनऊ के बाजारों में अब ईद की रौनक साफ दिखाई देने लगी है। कपड़ों की दुकानों पर भीड़। मिठाइयों और सेवइयों की खरीदारी। बाजारों में देर रात तक चहल-पहल। शहर मानो ईद के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हो रहा है।
और शायद यही रमज़ान की सबसे खूबसूरत बात है। यह महीना खत्म जरूर होता है, लेकिन इसके साथ जो इंसानियत, सब्र और मोहब्बत का पैगाम मिलता है, वह पूरे साल साथ चलता है।
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