
लखनऊ स्थित King George’s Medical University (KGMU) इन दिनों इलाज से ज्यादा इंसाफ की मांग को लेकर सुर्खियों में है।
9 जनवरी 2026 को परिसर में हुई तोड़फोड़ और महिलाओं के साथ अभद्रता की घटना के 72 घंटे बाद भी FIR दर्ज न होना, अब सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सिस्टम फेल्योर की मिसाल बनता जा रहा है।
72 घंटे बीते, FIR अब भी फाइलों में अटकी
संयुक्त समिति (Teachers, Resident Doctors, Nursing Staff & Employees) का कहना है कि उसी दिन चौक थाने में तहरीर दी गई लेकिन FIR अब तक दर्ज नहीं।
महिला आयोग की उपाध्यक्ष पर भी सवाल
समिति ने महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव की भूमिका पर गंभीर आपत्ति जताई है। आरोप है कि उनके साथ आए 100–150 लोगों ने महिला अधिकारियों से अभद्रता, कुलपति व वरिष्ठ अधिकारियों को घेरा, और बाद में गलत तथ्यों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर KGMU की छवि खराब की।
सुरक्षा पर बड़ा सवाल
समिति का साफ कहना है— “अगर कुलपति सुरक्षित नहीं, तो रेजिडेंट डॉक्टर किस भरोसे ICU संभालें?”
OPD बंद करने का अल्टीमेटम
मानवता दिखाते हुए समिति ने पहले 24 घंटे का अतिरिक्त समय दिया। लेकिन चेतावनी बिल्कुल साफ है अगर 24 घंटे में FIR दर्ज नहीं हुई 13 जनवरी 2026 से OPD सेवाएं बंद। सिर्फ Emergency Services चालू रहेंगी।

यह फैसला मरीजों के खिलाफ नहीं, बल्कि सिस्टम को जगाने के लिए बताया गया है।
13 जनवरी को निर्णायक बैठक
संयुक्त समिति ने ऐलान किया है कि 13 जनवरी 2026 | दोपहर 2 बजे। आगे की रणनीति तय करने के लिए महत्वपूर्ण बैठक होगी। अब यह मुद्दा सिर्फ KGMU तक सीमित नहीं रहा— यह प्रशासन, पुलिस और राजनीतिक हस्तक्षेप की कसौटी बन चुका है।
तो सवाल सिर्फ एक है— बीमार कौन है? मरीज या व्यवस्था?
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