
भारतीय टेनिस ने ऑस्ट्रेलियाई धरती पर एक नया milestone जोड़ लिया है। महज 14 साल की उम्र में जेन्सी कानाबार ने वो कर दिखाया, जो अब तक कोई भारतीय लड़की नहीं कर पाई थी— Australian Open Under-14 टाइटल जीतना।
फाइनल में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की मुसेम्मा किलेक को हराकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया।
फाइनल की कहानी: पीछे से आगे, हार से इतिहास तक
फाइनल मुकाबले की शुरुआत जेन्सी के लिए आसान नहीं रही। वह 3-6, 0-2 से पीछे चल रही थीं और लग रहा था कि घरेलू खिलाड़ी का पलड़ा भारी है। लेकिन यहीं से शुरू हुई असली कहानी। जेन्सी ने धैर्य, फिटनेस और shot selection का ऐसा कॉम्बिनेशन दिखाया कि मैच की दिशा ही बदल गई।
- तीसरा सेट: 6-4
- निर्णायक सेट: 6-1
और फिर… ऑस्ट्रेलियाई कोर्ट पर Indian Tricolour लहराया।
पहली भारतीय महिला, जिसने U14 AO ट्रॉफी उठाई
Australian Open Asia Pacific Elite 14 & Under Trophy में जेन्सी का सफर flawless रहा। उन्होंने टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं गंवाया और खिताब अपने नाम किया।
दिलचस्प बात यह है कि लड़कों में यह खिताब 2024 में अर्णव पापरकर ने जीता था और अब जेन्सी कानाबार ने girls category में इतिहास रच दिया। यानी Indian junior tennis का future अब headline नहीं, fact बन चुका है।

सटायर जो गर्व से मुस्कुराता है
जब उम्र 14 हो और दबाव international हो, तब excuses नहीं, champions पैदा होते हैं।
कौन हैं जेन्सी कानाबार?
जूनागढ़, गुजरात से आने वाली जेन्सी कानाबार भारत की सबसे promising junior tennis players में से एक हैं। उन्होंने बेहद कम उम्र में रैकेट उठाया और तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनकी उपलब्धियां खुद बोलती हैं-
- AITA U14 और U16 में No.1 Ranking
- 2026 की शुरुआत में AITA Women’s Singles No.1
- सितंबर 2025 में GSPDP Asian U14 Junior Championship का खिताब
- Debut में ITF J30 Ahmedabad Singles Title
- Fenesta Open National Tennis Championship विजेता
Consistency, confidence और calm—तीनों का rare combo।
Indian Women’s Tennis को मिला नया चेहरा
जेन्सी की यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं है। यह उस सोच का जवाब है कि international success “later stage” पर आती है। यह जीत बताती है— Talent अगर सही हाथों में हो, तो उम्र सिर्फ एक नंबर होती है।
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