
भारत की समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए इंडियन कोस्ट गार्ड (ICG) को उसका पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ मिल गया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गोवा में इस अत्याधुनिक पोत को आधिकारिक तौर पर कमीशन किया। यह सिर्फ एक जहाज नहीं, बल्कि समुद्र की सेहत बचाने का भारत का संकल्प है।
Make in India on High Seas
114.5 मीटर लंबे समुद्र प्रताप को बनाने में 60% से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। इसका निर्माण Goa Shipyard Limited ने किया है, जिसने दिसंबर में इसे औपचारिक रूप से ICG को सौंपा था।
कोस्ट गार्ड के मुताबिक, यह दो प्रदूषण नियंत्रण पोतों में से पहला है।
Make in India अब सिर्फ ज़मीन पर नहीं, समंदर में भी तैर रहा है।
क्या है Samudra Pratap की ताकत? | Key Features
समुद्र प्रताप सिर्फ दिखने में बड़ा नहीं, क्षमताओं में भी दमदार है:
- वजन: 4,200 टन
- स्पीड: 22 नॉट्स से ज्यादा
- रेंज: 6,000 नॉटिकल माइल्स (बिना रुके)
- ऑयल लीक डिटेक्शन सिस्टम
- केमिकल डिटेक्टर्स और एडवांस कैमरे
Defence Meets Environment
पर्यावरण सुरक्षा के साथ-साथ यह पोत हार्ड सिक्योरिटी में भी पीछे नहीं:
- 30mm CRN-91 Naval Gun
- 2 Remote Operated Guns with Integrated Fire Control
- Indigenous Integrated Bridge System
- Automatic Power Management System
- High-Capacity External Fire Fighting System
यानि प्रदूषण से लड़ाई भी और सुरक्षा भी—एक साथ।
ICG को कैसे करेगा मजबूत?
समुद्र प्रताप ICG की भूमिका को कई स्तरों पर मजबूत करेगा:
Marine Pollution Control
Search and Rescue Operations
Enforcement of Maritime Laws
Protection of India’s EEZ (Exclusive Economic Zone)
Disaster Response during Oil Spills

सीधे शब्दों में कहें तो— अब समंदर गंदा करना आसान नहीं होगा।
समुद्री प्रदूषण फैलता कैसे है? | The Real Enemy
समुद्री प्रदूषण कोई एक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम फेल्योर है:
- नदियों से बहता शहरी सीवेज
- इंडस्ट्रियल केमिकल्स और वेस्ट
- खेती से आए कीटनाशक और उर्वरक
- माइक्रोप्लास्टिक और हवा से उड़ता कचरा
- जहाजों और ऑयल रिग्स से तेल रिसाव
इनका सबसे बड़ा नुकसान होता है Marine Life और Blue Economy को।
इंसान फैलाए, कोस्ट गार्ड साफ करे
हम जमीन पर प्लास्टिक फेंकते हैं, नदियां उसे समुद्र तक पहुंचाती हैं, और फिर उम्मीद करते हैं कि समंदर खुद साफ रह जाए।
अब कम से कम भारत के पास ‘समुद्र प्रताप’ है— जो इंसानी लापरवाही से लड़ सके।
‘समुद्र प्रताप’ का कमीशन होना सिर्फ एक डिफेंस इवेंट नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश, आत्मनिर्भर भारत की मिसाल और Blue Economy की सुरक्षा। अब समंदर की रखवाली सिर्फ लहरों पर नहीं, तकनीक पर भी है।
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