
भारत की रणनीतिक विदेश नीति एक बार फिर कड़े इम्तिहान में है। एक ओर अमेरिका है — भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार, तो दूसरी ओर रूस — दशकों पुराना रक्षा और ऊर्जा सप्लायर। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के 50% टैरिफ धमाके ने यह सवाल खड़ा कर दिया है: क्या भारत को रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद कर देना चाहिए?
रूस से सस्ते तेल की ‘बड़ी डील’
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर पश्चिमी पाबंदियों ने उसे भारत को भारी छूट पर कच्चा तेल बेचने को मजबूर कर दिया। 2018 में 1.3% था रूस से आयात, जो अब 35% तक पहुंच गया है। “रूस से सस्ता तेल भारत को हर साल करीब 10 बिलियन डॉलर की बचत करा रहा है।”
ट्रंप का टैरिफ़ ब्रह्मास्त्र: अमेरिका का जवाब
लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इससे नाराज़ हैं। उन्होंने भारत पर पहले से लगे 25% टैरिफ़ में 25% और जोड़ दिया, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया।
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50% टैरिफ़ से भारत को 50 बिलियन डॉलर तक का नुकसान।
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50,000 तक नौकरियां भी जा सकती हैं।
भारत के पास हैं क्या विकल्प?
“इतिहास गवाह है कि मुश्किल समय में रूस ने भारत का साथ दिया है, अमेरिका ने नहीं।”
1971 युद्ध में रूस का सपोर्ट
1998 परमाणु परीक्षण के बाद रूस का साथ
संतुलन बनाना ज़रूरी है
भारत हमेशा से गुटनिरपेक्ष नीति का पक्षधर रहा है। यानी ना पूरी तरह अमेरिका के साथ, ना पूरी तरह रूस के। भारत को एकतरफा अमेरिकी शर्तें नहीं माननी चाहिए। स्वतंत्र निर्णय लेने की ज़रूरत है।
व्यापार के मोर्चे पर क्या हो सकता है?
भारत का अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस — $41 बिलियन। निर्यात घटा तो भारतीय उद्योग और नौकरियों पर असर तय।

निर्यात के लिए यूरोप, जापान, UAE, UK जैसे नए बाजारों पर ध्यान देना चाहिए। झींगा (Prawns) जैसे उत्पादों के लिए यूके पहले ही तैयार है।
भारत को क्या करना चाहिए?
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Rational Diplomacy: अमेरिका से बैकचैनल बातचीत तेज़ करनी चाहिए।
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Export Diversification: नए ट्रेड पार्टनर और सेक्टर खोजने होंगे।
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Domestic Reforms: हफ्ते में 6 दिन काम लागू हो तो GDP में 2% उछाल।
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Strategic Balance: अमेरिका और रूस दोनों से दूरी ना बनाकर, संतुलन ज़रूरी।
दबाव में नहीं, दिमाग से काम ले भारत
ट्रंप का टैरिफ़ सिर्फ़ आर्थिक धमकी नहीं, बल्कि जियोपॉलिटिकल चाल है। भारत को अब मजबूत, स्वतंत्र और समझदारी भरी विदेश नीति की ज़रूरत है — ताकि न सिर्फ अपना आर्थिक नुकसान रोका जा सके, बल्कि भविष्य के टकरावों के लिए भी तैयार रहा जा सके।
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