
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की ओपन डिबेट में भारत ने पाकिस्तान को कूटनीतिक आईना दिखा दिया।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने पाकिस्तान में चल रही राजनीतिक, संवैधानिक और सामाजिक अराजकता को उसके सीमा पार आतंकवाद के लंबे इतिहास से जोड़ते हुए करारा जवाब दिया।
उन्होंने दो टूक कहा— जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं और हमेशा रहेंगे।
कश्मीर पर पाकिस्तान की “दोहरे चरित्र” वाली नीति
राजदूत पर्वतनेनी ने कहा कि UNSC मंच पर पाकिस्तान द्वारा बार-बार जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाना इस बात का सबूत है कि “पाकिस्तान वहां के लोगों की भलाई नहीं, बल्कि सिर्फ अस्थिरता और नुकसान चाहता है।”
सटायर साफ था—जो देश अपने ही इलाकों में शांति नहीं ला पाया, वह कश्मीर का ठेकेदार बनने चला है।
इमरान खान का मुद्दा: लोकतंत्र पर सवाल
भारत ने पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति पर भी सीधा प्रहार किया।
राजदूत ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं, उनकी पार्टी पर प्रतिबंध लगाया गया। आतंकवाद विरोधी कानूनों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोध दबाने के लिए हो रहा है।
यहां तक कि UNSC की स्पेशल दूत एलिस जिल एडवर्ड्स ने भी अडियाला जेल में इमरान खान के साथ कथित अमानवीय व्यवहार पर चिंता जताई है।
असीम मुनीर और ‘संवैधानिक तख्तापलट’
भारत ने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन को लोकतंत्र के नाम पर मज़ाक करार दिया। इस संशोधन के जरिए— आर्मी चीफ असीम मुनीर को आजीवन कानूनी इम्युनिटी उन्हें तीनों सेनाओं का सर्वोच्च प्रमुख (CDF) बना दिया गया।

राजदूत का सटीक तंज था— जहां सेना संविधान से ऊपर हो, वहां लोकतंत्र सिर्फ किताबों में रहता है।
“आतंकवाद का केंद्र है पाकिस्तान”
भारत ने साफ कहा कि पाकिस्तान एक अस्थायी UNSC सदस्य होने के बावजूद देशों को बांटने की राजनीति कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को निभाने में विफल रहा है। सीधा संदेश— जो खुद आतंकवाद का एक्सपोर्टर हो, वह शांति का पाठ नहीं पढ़ा सकता।
सिंधु जल संधि पर भी खरी-खरी
राजदूत पर्वतनेनी ने सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान को जमकर घेरा।
उन्होंने कहा— भारत ने 65 साल पहले संधि पर ईमानदारी से हस्ताक्षर किए। पाकिस्तान ने तीन युद्ध और दर्जनों आतंकी हमलों से इसका उल्लंघन किया।
उन्होंने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए बताया कि 26 निर्दोष लोगों की हत्या सिर्फ इसलिए की गई क्योंकि वे हिंदू थे।
भारत का स्पष्ट स्टैंड— जब तक पाकिस्तान आतंकवाद नहीं छोड़ेगा, सिंधु जल संधि पर पुनर्विचार जारी रहेगा।
UNSC में भारत का संदेश बेहद साफ था— कश्मीर, आतंकवाद और लोकतंत्र पर पाकिस्तान की नैतिकता शून्य है।
पहले अपने देश में शांति, संविधान और इंसानियत बहाल करो, फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भाषण देने आना।
