
मार्च अभी आधा भी नहीं बीता…लेकिन सूरज ने जैसे मई-जून की ट्रेन पकड़ ली हो. दिल्ली में तापमान 35 से 40 डिग्री के बीच झूल रहा है. उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में पारा मार्च में ही 40°C को छूने लगा है.
यानी गर्मी ने इस साल शेड्यूल तोड़ दिया है. और वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तो अभी ट्रेलर है. असल फिल्म तब शुरू होगी जब अल नीनो पूरी ताकत से एक्टिव होगा.
मार्च में ही गर्मी का ट्रेलर
भारत में आम तौर पर भीषण गर्मी अप्रैल के आखिर या मई में दस्तक देती है. लेकिन इस बार मौसम का कैलेंडर जैसे रीराइट हो गया है. दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य भारत में तापमान तेजी से बढ़ रहा है.
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यही रफ्तार बनी रही तो इस साल गर्मी के कई पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं. कुछ पूर्वानुमानों में तो यहां तक कहा जा रहा है कि आने वाले महीनों में अति भीषण लू देखने को मिल सकती है.
अल नीनो का बड़ा खेल
मौसम वैज्ञानिकों की निगाहें इस समय प्रशांत महासागर पर टिकी हुई हैं. क्योंकि वहीं से शुरू होता है अल नीनो का खेल. जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, तब वैश्विक मौसम पैटर्न बदलने लगता है.
इस बदलाव का असर भारत पर भी पड़ता है. अल नीनो के दौरान भारत की ओर आने वाली नमी से भरी मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाती हैं. यही वजह है कि कई बार अल नीनो के सालों में मानसून कमजोर पड़ जाता है.
मानसून पर मंडराता खतरा
वैश्विक मौसम एजेंसियों के अनुसार जून से अगस्त के बीच अल नीनो के विकसित होने की लगभग 60% संभावना है. अगर यह मजबूत हुआ तो भारत में मानसून का दूसरा चरण यानी अगस्त और सितंबर प्रभावित हो सकता है.
भारत में साल भर की करीब 70% बारिश मानसून के दौरान होती है.

ऐसे में अगर बारिश कम हुई तो कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति भी बन सकती है. हालांकि मौसम वैज्ञानिक यह भी कहते हैं कि अल नीनो होने का मतलब हमेशा कमजोर मानसून नहीं होता. कई बार इसके बावजूद बारिश सामान्य भी रही है.
लू का खतरा बढ़ेगा
अल नीनो का एक और असर भी है. यह उत्तरी और मध्य भारत में लू के खतरे को बढ़ा सकता है. जब समुद्री हवाएं कमजोर पड़ती हैं तो जमीन ज्यादा गर्म हो जाती है. इससे तापमान तेजी से बढ़ता है और कई इलाकों में हीटवेव की स्थिति बन जाती है.
इतिहास भी यही कहता है. 1997-98 और 2015-16 के दौरान मजबूत अल नीनो ने दुनिया भर में रिकॉर्ड तापमान दर्ज कराए थे.
वैज्ञानिक क्या कहते हैं
लखनऊ के वैज्ञानिक सतीश पाण्डेय कहते हैं, “अल नीनो का प्रभाव पूरी दुनिया की जलवायु पर पड़ता है. भारत में इसका सबसे बड़ा असर गर्मी और मानसून पर दिखता है.” वे हल्के व्यंग्य में कहते हैं, “कैलेंडर में अभी मार्च लिखा है, लेकिन मौसम का मूड देखकर लगता है कि सूरज ने मई की फाइल पहले ही खोल दी है.”
मौसम की बदलती कहानी
जलवायु परिवर्तन के दौर में मौसम का व्यवहार तेजी से बदल रहा है. जहां पहले मौसम का पैटर्न अनुमानित होता था, अब वह अचानक पलट जाता है. इस साल भारत के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है:
क्या यह गर्मी सिर्फ चेतावनी है या फिर आने वाले महीनों में रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव का संकेत? फिलहाल वैज्ञानिकों की निगाहें महासागर पर हैं. और भारत के लोग आसमान की ओर देख रहे हैं.
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