
पाकिस्तान की राजनीति में सन्नाटा कभी स्थायी नहीं रहता वहां हर हफ्ते कोई नया ‘ड्रामा एपिसोड’ रिलीज़ हो ही जाता है। इस बार केंद्र में हैं जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री Imran Khan। प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif के करीबी और वरिष्ठ नेता Rana Sanaullah के मुताबिक इमरान को दो बार ‘सीक्रेट डील’ ऑफर की गई!
अब सवाल ये है, ये सियासत है या सस्पेंस थ्रिलर?
‘सीक्रेट डील’ऑफर था या ऑफर लेटर?
राणा सनाउल्लाह के मुताबिक पहली कोशिश नवंबर 2024 से पहले की गई। कुछ सरकारी अधिकारी और नेता मध्यस्थ बने। दूसरी कोशिश हाल ही में विदेश से आए कुछ लोगों की मदद से की गई।
यानि, कहानी में ‘लोकल प्लॉट’ के साथ ‘इंटरनेशनल ट्विस्ट’ भी है। हालांकि, उनका कहना है कि शुरुआत में खान साहब ने पॉजिटिव सिग्नल दिया, मगर बाद में दोनों बार पीछे हट गए। सियासी भाषा में इसे कहते हैं “दिल मिला, पर दस्तख़त नहीं हुए।”
सत्ता की पिच पर फिर बैटिंग?
सरकार का आरोप है कि इमरान खान मौजूदा हुकूमत को गिराने की कोशिश में हैं और दोबारा सत्ता की पिच पर बैटिंग करना चाहते हैं। दूसरी तरफ उनकी पार्टी Pakistan Tehreek-e-Insaf का कहना है कि यह सब ‘राजनीतिक बदले’ का खेल है।
यानि पाकिस्तान की राजनीति वही पुरानी फिल्म है “हीरो कौन? विलेन कौन? और असली स्क्रिप्ट राइटर कौन?”
शहबाज सरकार में भी सुर अलग-अलग
दिलचस्प बात ये है कि सरकार के भीतर भी बयानबाज़ी में फर्क दिख रहा है। सूचना मंत्री ने साफ कहा कि कोई डील नहीं हो रही। कानून अपना काम कर रहा है और सजा अदालत के आदेश के तहत मिली है।

मतलब एक ही टीम में अलग-अलग माइक्रोफोन, और हर माइक पर अलग कहानी।
सेहत पर सियासत
इमरान खान के परिवार और पार्टी का दावा है कि जेल में उनकी तबीयत बिगड़ रही है, आंखों की रोशनी पर असर पड़ा है और उन्हें निजी डॉक्टरों की निगरानी में इलाज की जरूरत है।
अब पाकिस्तान की राजनीति में हेल्थ अपडेट भी ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ बन जाती है। कभी ‘वोट बैंक’ गर्म होता है, कभी ‘ब्लड प्रेशर’।
पाकिस्तान की राजनीति एक ऐसे प्रेशर कुकर की तरह है, जिसमें सीटी बजती रहती है पर ढक्कन खुलता नहीं। डील की बात हो या अपील की, हर बयान में सस्पेंस का तड़का है।
सवाल वही, क्या ये डील वाकई हुई? या फिर ये सिर्फ़ सियासी ‘ट्रायल बलून’ है? एक बात तय है, इस ड्रामे का अगला एपिसोड भी जल्दी ही आने वाला है।
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