नशा माफिया भागकर हरियाणा शिफ्ट, ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ के असर?

महेंद्र सिंह
महेंद्र सिंह

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया है कि राज्य में नशे के खिलाफ चल रही निर्णायक कार्रवाई के ठोस नतीजे सामने आ रहे हैं। उनके मुताबिक, जो नेटवर्क कभी बेखौफ काम करते थे, अब टूट रहे हैं और तस्कर राज्य छोड़ने को मजबूर हैं।

चीमा का सीधा आरोप है कि सख्ती बढ़ने के बाद ड्रग नेटवर्क हरियाणा की ओर शिफ्ट हो रहे हैं, जहां नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’: आप सरकार का फ्लैगशिप अभियान

चीमा ने कहा कि 2022 में भगवंत सिंह मान की अगुवाई में शुरू हुआ ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ सिर्फ नारा नहीं, बल्कि ग्राउंड-लेवल एक्शन प्लान है। विशेष सब-कमेटी का गठन। जिला स्तर पर कोऑर्डिनेशन मीटिंग्स। 1.5 लाख से अधिक गांव सुरक्षा कमेटी सदस्यों की शपथ।

उनका दावा है कि इस “whole-of-government + whole-of-society” मॉडल ने सप्लाई चेन पर चोट की है। पंजाब ने दरवाज़ा बंद किया, तो तस्करों ने अगला दरवाज़ा ढूंढ लिया?

हरियाणा में अफसर पर एक्शन, राजनीति गरम

चीमा ने हरियाणा पुलिस अधिकारी सुनील संधू का जिक्र करते हुए कहा कि एंटी-ड्रग ऑपरेशन के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई ने कई सवाल खड़े किए हैं।

उनका तर्क है—जो अधिकारी ड्रग नेटवर्क पर वार करते हैं, उन्हें संरक्षण मिलना चाहिए, न कि दबाव। यह बयान सीधे-सीधे हरियाणा सरकार की मंशा पर सवाल उठाता है।

अतीत की याद और वर्तमान की राजनीति

चीमा ने 2007-2017 के अकाली-भाजपा शासन का हवाला देते हुए कहा कि उस दौर में हेरोइन और ‘चिट्टा’ का फैलाव हुआ। उनका आरोप है कि वही पैटर्न अब हरियाणा में दिख रहा है।

राजनीतिक संदेश साफ है नशे पर एक्शन सिर्फ लॉ एंड ऑर्डर नहीं, इलेक्टोरल नैरेटिव भी है।

गुजरात का जिक्र और बड़ा फ्रेम

चीमा ने भाजपा-शासित राज्यों में बड़ी बरामदगियों का हवाला देते हुए कहा कि यह व्यापक नेटवर्क की ओर इशारा करता है। उनका दावा है कि जब्ती की बड़ी घटनाएं यह भी दिखाती हैं कि सप्लाई रूट्स कितने संगठित हैं।

हालांकि, विपक्ष का तर्क है कि बड़ी बरामदगी सख्त कार्रवाई का संकेत भी हो सकती है। यानी डेटा का चश्मा बदलिए, तस्वीर बदल सकती है।

ड्रग क्रैकडाउन या पॉलिटिकल क्रॉसफायर?

पंजाब-हरियाणा की यह जंग सिर्फ सीमाओं की नहीं, नैरेटिव की भी है। क्या वाकई तस्कर शिफ्ट हो रहे हैं? क्या हरियाणा में एक्शन कमजोर है? या यह राज्यों के बीच पॉलिटिकल वन-अपमैनशिप?

सच जो भी हो, नशा एक साझा चुनौती है और उसका समाधान भी साझा रणनीति से ही निकलेगा।

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