असेंबली में ‘वाइल्ड गेस्ट’!” गाजियाबाद स्कूल में तेंदुए की एंट्री, एग्जाम कैंसल

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

उत्तर प्रदेश के Ghaziabad में बुधवार की सुबह एक अजीब सन्नाटे के साथ शुरू हुई। एनडीआरएफ रोड स्थित Green Field School के परिसर में अचानक एक जंगली तेंदुआ दाखिल हो गया।

सुरक्षाकर्मी की सतर्क नजर ने मैदान में उसकी चहलकदमी पकड़ ली। CCTV फुटेज में वह क्लासरूम के दरवाजे तक पहुंचा, जैसे एडमिशन फॉर्म भरने आया हो, पर बंद दरवाजों ने उसे रोक दिया। करीब दो मिनट की ‘मॉर्निंग वॉक’ के बाद वह दीवार फांदकर निकल गया।

परीक्षा रद्द, अनहोनी टली

तेंदुए की मौजूदगी की सूचना मिलते ही स्कूल प्रशासन ने 11वीं की परीक्षा तुरंत निरस्त कर दी। अभिभावकों को मैसेज भेजकर बच्चों को घर पर ही रखने की अपील की गई। अगर सुरक्षाकर्मी की नजर चूक जाती और बच्चे समय पर पहुंच जाते, तो हालात भयावह हो सकते थे।

स्थानीय पुलिस अधिकारी के अनुसार, यह तेंदुआ मंगलवार रात को भी इलाके में देखा गया था। एहतियातन पूरे स्कूल परिसर को खाली करा दिया गया है।

वन विभाग का सर्च ऑपरेशन, रोड पर बैरिकेडिंग

घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। एनडीआरएफ रोड पर बैरिकेडिंग कर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया। विशेषज्ञ टीम तेंदुए के पैरों के निशान और CCTV फुटेज के आधार पर उसकी मूवमेंट ट्रैक कर रही है। आसपास के इलाकों में जाल बिछाए गए हैं।

स्थानीय निवासियों को घरों से कम बाहर निकलने की सलाह दी गई है। जब तक तेंदुआ पकड़ा नहीं जाता, सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा।

शहरी विस्तार और वन्यजीव टकराव

यह घटना सिर्फ एक सनसनीखेज खबर नहीं, बल्कि शहरीकरण और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव की कहानी भी है। जंगल सिमटते हैं तो जानवर रास्ता भटकते नहीं, वे बस अपने पुराने रास्तों पर लौटते हैं। शहर उन्हें ‘घुसपैठिया’ कहता है, पर असल सवाल यह है कि सीमा किसने बदली?

गाजियाबाद और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ वर्षों में वन क्षेत्र कम हुए हैं। ऐसे में तेंदुए जैसे जानवर रिहायशी इलाकों तक पहुंच रहे हैं।

प्रशासन अलर्ट, लोग सतर्क

फिलहाल पुलिस और वन विभाग की टीमें मुस्तैद हैं। स्कूल के सभी गेट बंद हैं और परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित है। स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है। एक बात तय है, इस ‘अनचाही विजिट’ ने सुरक्षा प्रोटोकॉल की परीक्षा जरूर ले ली है।

घटना टली, बड़ा सबक मिला

इस पूरे घटनाक्रम में राहत की बात यह रही कि कोई घायल नहीं हुआ। लेकिन यह घटना याद दिलाती है कि इंसानी बस्तियों और जंगल के बीच की रेखा अब बहुत पतली हो चुकी है। आज परीक्षा रद्द हुई है, कल शायद प्लानिंग बदलनी पड़े। क्योंकि जब शहर जंगल की ओर बढ़ता है, तो जंगल भी कभी-कभी हाजिरी लगा देता है।

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