संसद में ‘अनपब्लिश्ड बुक’! छपी नहीं, फिर भी चर्चा में नरवणे की किताब

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब “Four Stars of Destiny” अचानक संसद परिसर में चर्चा का विषय बन गई। वजह—लोकसभा में इसकी कॉपी दिख जाना। इसके बाद राजनीति, प्रकाशन जगत और सुरक्षा एजेंसियों—तीनों में हलचल मच गई।

संसद में लहराई किताब, बढ़ा विवाद

विवाद तब तेज हुआ जब राहुल गांधी के हाथ में संसद परिसर में किताब की कॉपी नजर आई। लोकसभा में उन्होंने इसके कुछ अंशों का हवाला देने की कोशिश की, लेकिन यह कहकर रोक दिया गया कि किताब अब तक आधिकारिक तौर पर प्रकाशित ही नहीं हुई है।

Penguin का साफ बयान: “किताब अब तक पब्लिश नहीं हुई”

किताब के प्रकाशक Penguin Random House India ने तुरंत बयान जारी कर कहा, “जनरल नरवणे की किताब को प्रकाशित करने का एकमात्र अधिकार हमारे पास है और यह अभी तक न तो प्रिंट में आई है, न डिजिटल रूप में, न ही किसी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई गई है।”

Penguin ने यह भी साफ किया कि किताब की कोई भी कॉपी या PDF कॉपीराइट उल्लंघन है और उसे तुरंत रोका जाना चाहिए।

FIR दर्ज, लीक की जांच शुरू

मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। जांच इस बात पर केंद्रित है कि अनपब्लिश्ड किताब की कॉपी या PDF आखिर लीक कैसे हुई और किसने इसे सार्वजनिक किया।

नरवणे का X पर रिएक्शन

जनरल नरवणे ने Penguin के बयान को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर शेयर करते हुए लिखा “Book status: Unpublished.”यानी इशारों-इशारों में साफ संदेश।

सवाल जो अब भी बाकी हैं

अनपब्लिश्ड किताब संसद तक कैसे पहुंची? क्या यह सिक्योरिटी ब्रीच है या सिर्फ पब्लिशिंग लीक? क्या संसद में ऐसी सामग्री लहराना नियमों के दायरे में है?

जो किताब बाजार में नहीं आई, वो संसद में कैसे छा गई? शायद भारत में पहले विवाद रिलीज़ होते हैं, किताब बाद में।

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