
शाम का वक्त। मस्जिदों की मीनारों के आसपास हल्की हवा चल रही है। रोजेदारों की निगाहें आसमान की ओर टिकी हैं क्योंकि एक पतला सा चांद पूरे महीने की इबादत का जश्न तय करता है।
इन दिनों दुनिया भर के मुसलमानों के लिए पाक महीना Ramadan चल रहा है। रोजे, इबादत और सब्र के इस महीने के खत्म होते ही खुशियों का त्योहार आता है—Eid al-Fitr।
लेकिन इस त्योहार की तारीख कैलेंडर से नहीं, बल्कि आसमान से तय होती है।
चांद का फैसला… तभी तय होगी ईद
इस्लामिक परंपरा के अनुसार, ईद की तारीख पूरी तरह चांद दिखने पर निर्भर करती है। इसलिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में ईद एक दिन के अंतर से मनाई जाती है।
मध्य पूर्व के देशों जैसे Saudi Arabia, United Arab Emirates और ईरान में चांद पहले दिखाई देता है। खगोलीय अनुमानों के मुताबिक, International Astronomical Center का कहना है कि इस साल 18 मार्च की शाम को सऊदी अरब में शव्वाल का चांद दिख सकता है।
अगर ऐसा हुआ, तो वहां 19 मार्च को ईद मनाई जाएगी।
भारत में कब होगी मीठी ईद?
भारत में ईद आमतौर पर सऊदी अरब के एक दिन बाद मनाई जाती है। इसका कारण है भौगोलिक दूरी और चांद दिखने का अलग समय। अगर सऊदी अरब में 18 मार्च को चांद दिखता है और 19 मार्च को ईद होती है, तो भारत में 19 मार्च की शाम चांद दिखने की उम्मीद होगी।
ऐसी स्थिति में भारत में 20 मार्च को ईद उल फितर मनाई जाएगी। लेकिन अगर 19 मार्च को चांद नजर नहीं आता, तो 20 मार्च की शाम चांद दिखाई देगा और ईद 21 मार्च को मनाई जाएगी।

यानी साफ शब्दों में भारत में ईद 20 या 21 मार्च को मनाई जा सकती है।
सिर्फ त्योहार नहीं… भावनाओं का जश्न
ईद सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि रिश्तों और इंसानियत का उत्सव भी है। एक महीने के रोजों के बाद लोग एक-दूसरे को गले लगाते हैं, “ईद मुबारक” कहते हैं और मिठाइयां बांटते हैं। घर-घर में सेवइयों की खुशबू फैल जाती है। बच्चे नए कपड़े पहनते हैं और ईदी का इंतजार करते हैं।
यही वजह है कि ईद को अक्सर “मीठी ईद” भी कहा जाता है।
चांद से भी ज्यादा तेज चलती है सोशल मीडिया
ईद का चांद देखने की परंपरा सदियों पुरानी है। लेकिन आज के दौर में एक मजेदार बदलाव भी आया है। पहले लोग मस्जिदों की छत पर चढ़कर चांद देखते थे। अब लोग मोबाइल स्क्रीन पर देखते हैं “Breaking: चांद दिख गया!” “Update: अभी नहीं दिखा!”
कभी-कभी ऐसा लगता है कि चांद से पहले WhatsApp यूनिवर्स में ईद का ऐलान हो जाता है।
आखिरी फैसला आसमान करेगा
खगोलीय अनुमान अपनी जगह हैं, लेकिन अंतिम फैसला हमेशा चांद के दीदार पर ही होगा। जैसे ही चांद दिखाई देगा, मस्जिदों और शहरों में ईद की खुशखबरी गूंज उठेगी। और फिर शुरू होगा गले मिलने, मिठाइयां बांटने और खुशियां मनाने का सिलसिला।
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