
दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में शनिवार रात कानून और अवैध निर्माण आमने-सामने आ गए। दिल्ली नगर निगम (MCD) ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास बने अवैध दवाखाने और बारात घर को ढहा दिया।
कार्रवाई इतनी संवेदनशील थी कि रातभर करीब 30 बुलडोजर चलाने पड़े और इलाका कर्फ्यू जैसे हालात में बदल गया।
जब नोटिस को “अफवाह” समझ लिया जाए, तब बुलडोजर “हकीकत” बनकर आता है।
पथराव, आंसू गैस और पुलिस का हल्का बल प्रयोग
बुलडोजर एक्शन के दौरान हालात उस वक्त बिगड़ गए जब पुलिस और MCD टीम पर पथराव शुरू हो गया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए और पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इस हिंसा में 5 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
CCTV, ड्रोन और बॉडीकैम से पहचान शुरू
दिल्ली पुलिस ने अब CCTV कैमरों, ड्रोन फुटेज और बॉडीकैम की मदद से उपद्रवियों की पहचान शुरू कर दी है। करीब 100 से ज्यादा वीडियो फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
अब तक 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि FIR अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई है।
सन्नाटा, बैरिकेडिंग और पैरामिलिट्री तैनाती
रविवार सुबह तुर्कमान गेट की तस्वीरें किसी सुरक्षा अभ्यास क्षेत्र जैसी दिखीं —
- गलियों में बिखरे पत्थर
- गिरी हुई स्कूटी-बाइक
- पड़े हुए टियर गैस कैनिस्टर
- हर गली पर बैरिकेडिंग
- दिल्ली पुलिस + पैरामिलिट्री फोर्स की भारी तैनाती
- एहतियातन वज्र वाहन भी तैनात
लोगों को घरों में रहने की सख्त हिदायत दी गई है।

हाई कोर्ट की अनुमति के बाद हुई कार्रवाई
सेंट्रल रेंज के Joint CP मधुर वर्मा ने बताया कि रामलीला मैदान क्षेत्र के सर्वे में मस्जिद के पास अवैध निर्माण सामने आया था। MCD ने इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट से विधिवत अनुमति ली।
अवैध निर्माणकर्ताओं को पहले नोटिस, फिर खाली करने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन जब आदेश नहीं माना गया, तो कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की गई।
बड़ा सवाल: कानून का राज या सड़क का शोर?
तुर्कमान गेट की घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है — क्या कानून का पालन विरोध से तय होगा, या कोर्ट के आदेश से?
कानून अंधा होता है, लेकिन CCTV नहीं।
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