मोदी जी तो बड़े वो निकले! Mango आदमी का चैन से धुआँ उड़ाना भी गुनाह

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

यार, पहले वक्त था — थक जाओ, स्ट्रेस हो, गर्मी हो या सर्दी — एक सिगरेट और सब ठीक। अब? सिगरेट ऐसे महँगी होगी कि बजट से ज्यादा, टेंशन से ज्यादा खर्चा लगेगा। सोचो — 100 रुपये की सिगरेट पहले आराम देती थी, अब वो 150–200 रुपये हो जाए… क्या मन करेगा कि “जिंदगी के धुएँ” फूँके?

घर, किराया, बिजली — सब पहले से महँगे थे, अब सिगरेट भी जोड़ दो

पहले से EMI, बिल, किराया, बच्चों की पढ़ाई — सब खर्च बढ़ रहे हैं। और अब सिगरेट जैसे “छोटे सुख” को भी टैक्स के हाथों “महँगे सुख” बना दिया गया।
वो पुरानी आदतें अब बन जाएँगी — “सोच समझकर धुआँ उड़ाओ”, मतलब पैसे उड़ाओ।

तनाव है, धुआँ चाहिए — लेकिन बैंक बैलेंस कहेगा ‘ना भाई’

काम का प्रेशर, आर्थिक तनाव, बच्चों की फ़िक्र… ऐसे में सिगरेट या गुटखा बन जाते थे कुछ पल का सुकून। लेकिन अब?
“Smoke + High Tax = Double Pressure”

इसके आगे वो कौनसी राहत ढूंढेगा?

स्मोकिंग मिक्सचर महँगा = झटका For Pipe- lovers

बड़ी चालाकी से टैक्स लगा दिया — Smoking mixture पर 325% एक्साइज ड्यूटी! मतलब अगर आपको ये लग रहा था कि “पाइप से कम लगने वाला है”— वो भी अब महँगा साबित होगा।

आम आदमी पूछ रहा — ये सरकार है या Budget Horror Movie?

Budget में प्यार से कहते थे — “GST थोड़ा कम करते हैं, पॉकेट हल्की हो जाएगी।”
अब वही सरकार कह रही है — “धुआँ कम करो, और Tax दोगुना!”

कौन है जिसके पास इतनी कमाई कि महँगी सिगरेट, महँगा गुटखा और महँगी आदतों का बोझ उठा सके?

क्या करें आम आदमी? — थोड़ा तंज, थोड़ा समाधान

धुआँ छोड़ दो — सस्ता है, फ्री है, helthy है। हां, stress है, tension है, butայն… इसकी cost इतनी भारी न हो कि बचपन की बचत उड़ जाए। थोड़ा walking, थोड़ा deep breath, थोड़ा time-out — मज़ाक ही सही, कम खर्चा है।

“हेलो यूपी, किसी भी प्रकार के तम्बाकू, सिगरेट, गुटखा या निकोटिन उत्पाद का प्रचार-प्रसार नहीं करता।
यह लेख केवल आम आदमी की महँगाई, तनाव और रोजमर्रा की समस्याओं को हास्य के माध्यम से दिखाने के लिए लिखा गया है।
Smoking and Tobacco are Injurious to Health — Please Avoid.”

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