
बिहार चुनाव आते ही सियासी घरों में दरवाजे खुलने से ज़्यादा बंद हो रहे हैं। ताजा मामला है चिराग पासवान और एनडीए के बीच चल रही रार का। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, जब चिराग से मिलने उनके आवास पहुँचे,
तो उन्हें दरवाजा नहीं, खाली ड्राइंग रूम मिला, क्योंकि चिराग साहब पहले ही मंत्रालय निकल चुके थे।
“जब तक मंत्री हूं…” – चिराग की लाइन में सस्पेंस का पाउडर
चिराग पासवान ने चलते-चलते जो कहा, वो किसी फिल्मी क्लाइमेक्स से कम नहीं था:
“जब तक मंत्री हूं, मंत्रालय की जिम्मेदारी है।”
अब “जब तक” पर सबकी नजर है – क्या मंत्री पद खतरे में है?
या चिराग खुद ही अगला दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं?
दूसरी बार मिलने का प्रयास – राजनीति या रिश्तेदारी?
सूत्रों की मानें तो नित्यानंद राय एक ही दिन में दो बार चिराग के लिए समय निकाल चुके हैं, जो आजकल नेताओं की भाग-दौड़ भरी लाइफ में बहुत कुछ कहता है। अब देखना है कि अगली बार चिराग घर पर मिलेंगे या Zoom लिंक भेज देंगे।
एनडीए और LJP (रामविलास) – साथ-साथ या “सॉरी, नो सीट”?
एनडीए को डर है कि चिराग पासवान कहीं फिर से ‘B-टीम’ ना बन जाएं और बिहार में सीटों पर जो समीकरण बना है, उसे Emoji की तरह टेढ़ा कर दें। उधर, चिराग अब किंगमेकर नहीं, खुद राजा बनने की लय में दिख रहे हैं। उनका मूड स्विंग और seat swing साथ-साथ चल रहा है।

राजनीतिक रियलिटी शो का नया एपिसोड – “चिराग कौन बनेगा NDA स्टार?”
हर चुनाव से पहले NDA को कोई न कोई भावनात्मक झटका ज़रूर लगता है। कभी सीट बंटवारे पर, कभी चेहरों पर और अब, दरवाजे पर! नित्यानंद राय जैसे वरिष्ठ मंत्री का इस तरह बिना मुलाकात लौटना NDA की “बिना नेटवर्क की कॉल” जैसा लग रहा है।
चिराग की रणनीति या राजनीति की रेखाचित्र?
चिराग पासवान अपने बयान से दबाव की राजनीति कर रहे हैं। मंत्री पद का टेक्निकल इस्तीफा नहीं, लेकिन इमोशनल ट्रिगर दे रहे हैं।सीट शेयरिंग से पहले Signal भेज रहे हैं — Negotiation का टाइम है भाई!
बिहार की सियासत में सीट से पहले सेटिंग जरूरी है
चिराग पासवान का “जब तक मंत्री हूं…” वाला बयान सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि 2025 के चुनावी प्री-स्क्रिप्टेड सस्पेंस का टीज़र है।
एनडीए को अब ये तय करना होगा कि चिराग को मना रहे हैं या मनवाने दे रहे हैं।
