रेट्रो रिव्यू चरस: “धर्मेंद्र Vs ड्रग माफिया — चरस में जलवा ही जलवा था!”

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

चरस” सिर्फ एक मसाला फिल्म नहीं थी, बल्कि 1972 में ईदी अमीन द्वारा भारतीयों को युगांडा से निकाले जाने की सच्ची घटनाओं से प्रेरित थी। रामानंद सागर ने इसे बनाया और धर्मेंद्र ने इसे “धो डाला”! एक NRI फैमिली की त्रासदी, ड्रग तस्करी, माफिया से मुठभेड़ और सस्पेंस का झूला — सब कुछ इस फिल्म में है।

प्लॉट का पंच: धर्मेंद्र का “माल्टा मिशन”

धर्मेंद्र उर्फ सूरज कुमार, युगांडा से भागता है, बहन को खो बैठता है, बाप सदमे से मर जाता है — और फिर शुरू होती है उसकी मिशन मल्टीनेशनल बदला यात्रा।

इंडिया आते ही मालूम पड़ा कि कालीचरण (अजीत) ने पुश्तैनी जायदाद हड़प ली है। फिर मिलता है फर्जी माफिया डॉन। फिर आती हैं सुधा (हेमा मालिनी) – स्टेज डांसर, जिनका पास्ट उतना ही मिस्ट्री है जितनी उनकी आंखें।

आख़िरकार, सूरज रोम और माल्टा में जाकर रेस्क्यू मिशन मोड में चला जाता है, बहन को ढूंढता है और विलन के बॉन्ड-विलेन स्टाइल अड्डे में धावा बोल देता है।

सुधा: स्टेज पर नाचती, पर्दे के पीछे फंसती

हेमा मालिनी का किरदार सुधा – एक “शरीफ़ लड़की जो बदनाम हो गई”, क्योंकि कालीचरण ने उसे मर्डर केस में ब्लैकमेल कर लिया और ड्रग माफिया का मोहरा बना डाला।

Note: बॉलीवुड की परंपरा रही है – नायिका अगर नर्तकी हो, तो अतीत ज़रूर “थोड़ा धुंधला” होगा।

Side Characters का सुपर सपोर्टिंग रोल

अमजद खान – एक रहस्यमयी गुर्गा

असरानी – रूस्तम नाम का पुलिस वाला, जो गंभीरता से ज़्यादा कॉमेडी करता है

केष्टो मुखर्जी – पुलिस में होते हुए भी हर सीन में “लिक्विड सपोर्ट” में रहते हैं

अरुणा ईरानी – निम्मू बनी, पर इमोशनल एंगल में ज़्यादा कुछ न कर पाई

संगीत: जब गीतों में भी चरस घुल गई

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और आनंद बख्शी की जोड़ी ने वो जादू किया कि ‘चरस चरस’ गाना हर पार्टी प्लेलिस्ट में शामिल हो गया। आइए नज़र डालते हैं हिट गानों पर:

गाना गायक
कल की हसीन मुलाक़ात किशोर कुमार, लता मंगेशकर
आजा तेरी याद आई लता, मोहम्मद रफ़ी
राजा ना जा लता मंगेशकर
मेरा नाम बैलेरीना आशा भोसले
मैं एक शरीफ लड़की लता मंगेशकर
चरस चरस आशा भोसले, महेंद्र कपूर

Fun Fact: “मेरा नाम बैलेरीना” सुनकर उस दौर की आंटियाँ भी बैले डांस करने लगी थीं।

क्लाइमैक्स में धमाका: बॉन्ड स्टाइल विलेन का अड्डा + धर्मेंद्र का पंच

कालीचरण ने सुधा को बंधक बनाया, लेकिन धर्मेंद्र ने उसे ऐसे छुड़ाया जैसे स्पेशल फोर्स वाले मिक्स मार्शल आर्ट ट्रेनिंग लेकर आए हों।

फिल्म का मैसेज:
“कभी बहन खोओ, कभी ज़मीन – लेकिन कभी उम्मीद मत खोना… और हां, चरस से बचना।”

अगर ये फिल्म आज बनती, तो OTT पर ‘Breaking Charas’ नाम से ट्रेंड कर रही होती!

सोचिए: धर्मेंद्र नेटफ्लिक्स पर माल्टा में नर्कोटिक्स सिंडिकेट से भिड़ रहे हैं, और बैकग्राउंड में “मेरा नाम बैलेरीना” का Lo-Fi वर्जन चल रहा है।

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