उगते-डूबते सूर्य को अर्घ्य: क्यों सबसे कठिन माना जाता है चैती छठ?

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

भारत में त्योहार सिर्फ कैलेंडर की तारीखें नहीं होते, वे भावनाओं की धड़कन होते हैं। और जब बात छठ की हो, तो यह सिर्फ पूजा नहीं बल्कि आस्था की तपस्या बन जाती है।

चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व अनुशासन, शुद्धता और भक्ति का अनोखा संगम है। चैत्र महीने में मनाए जाने के कारण इसे चैती छठ कहा जाता है। इस दौरान भक्त Surya Dev और Chhathi Maiya की पूजा करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार छठी माता सूर्य की बहन मानी जाती हैं और यह व्रत संतान की लंबी उम्र, परिवार की समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है।

2026 में यह पर्व 22 मार्च से 25 मार्च तक मनाया जाएगा।

चार दिनों की तपस्या: छठ व्रत का पूरा कैलेंडर- नहाय-खाय: व्रत की पवित्र शुरुआत

पहले दिन व्रती स्नान कर शुद्धता का संकल्प लेते हैं। नदी, तालाब या गंगाजल से स्नान के बाद घर में सात्विक भोजन बनाया जाता है। इस दिन आमतौर पर कद्दू-भात खाया जाता है। यही वह क्षण होता है जब व्रत सिर्फ अनुष्ठान नहीं बल्कि अनुशासन का रूप ले लेता है।

खरना: जब शुरू होता है 36 घंटे का कठिन व्रत

दूसरे दिन पूरे दिन उपवास रखा जाता है। शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनता है। इसी प्रसाद को ग्रहण करने के बाद शुरू होता है 36 घंटे का निर्जला व्रत। यह व्रत सिर्फ शरीर की परीक्षा नहीं, बल्कि मन की भी परीक्षा माना जाता है।

संध्या अर्घ्य: डूबते सूर्य को प्रणाम

तीसरे दिन घाटों पर अद्भुत दृश्य दिखाई देता है। नदी किनारे हजारों लोग खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। यह दृश्य भारतीय संस्कृति की सबसे सुंदर तस्वीरों में से एक माना जाता है— जहाँ आस्था, संगीत और लोक परंपरा एक साथ दिखाई देती है।

उषा अर्घ्य और पारण: व्रत का समापन

चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है। इस क्षण को व्रती सबसे भावुक पल मानते हैं क्योंकि चार दिन की तपस्या का समापन यहीं होता है।

व्रती के लिए जरूरी नियम

छठ व्रत में अनुशासन सबसे बड़ा नियम माना जाता है।

• बिना सिलाई वाले शुद्ध कपड़े पहनना
• पलंग पर नहीं बल्कि चटाई पर सोना
• भोजन मिट्टी के चूल्हे पर बनाना
• पूजा के दौरान मन और घर दोनों को शुद्ध रखना

इन नियमों का उद्देश्य सिर्फ परंपरा निभाना नहीं बल्कि शुद्धता बनाए रखना है।

व्रत में क्या करें

छठ के दौरान भक्तों को सात्विक जीवनशैली अपनानी होती है।

• घर और पूजा स्थल को साफ रखें
• स्नान के बाद ही पूजा करें
• बांस के सूप और मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करें
• प्रसाद में ठेकुआ, गन्ना और फल रखें
• परिवार के साथ भक्ति भाव से पूजा करें

व्रत में क्या बिल्कुल न करें

छठ व्रत में कई चीजें पूरी तरह वर्जित मानी जाती हैं।

• प्याज, लहसुन, मांस और शराब का सेवन
• गंदे हाथों से पूजा सामग्री छूना
• प्लास्टिक के बर्तन इस्तेमाल करना
• वाद-विवाद या गुस्सा करना
• अर्घ्य से पहले भोजन करना

इन नियमों को तोड़ना व्रत की पवित्रता को भंग माना जाता है।

छठ और आधुनिक जीवन

दिलचस्प बात यह है कि जो लोग रोज़ सुबह उठकर अलार्म से लड़ते हैं, वही छठ के दौरान बिना अलार्म के 3 बजे उठ जाते हैं। जो लोग रोज़ डाइट प्लान भूल जाते हैं, वे छठ में 36 घंटे पानी तक नहीं पीते। और जो लोग रोज़ फोन के बिना नहीं रह सकते वे छठ के दौरान घंटों नदी किनारे खड़े होकर सिर्फ भक्ति में डूबे रहते हैं। यही है भारतीय त्योहारों की असली ताकत।

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