
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक आज खास रही। सरकार ने एक ही राउंड में तीन बड़े फैसलों पर मुहर लगाकर साफ कर दिया कि 2025-26 की तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है। जहां एक तरफ जनगणना 2027 के लिए भारी-भरकम बजट पास हुआ, वहीं कोयला सेक्टर को हाईवे की तरह स्मूद बनाने के लिए ‘कोलसेतु’ नाम की नई नीति को मंजूरी मिली। तीसरा बड़ा फैसला नारियल किसानों के चेहरे पर मुस्कान लाने वाला रहा—कोप्रा MSP पर नीतिगत अनुमति मिल गई।
11718 करोड़ में तैयार होगी ‘डेटा की सबसे बड़ी गिनती’ – जनगणना 2027
सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 11718 करोड़ रुपये का मेगा बजट मंजूर किया है।
इसका मतलब, देश की सबसे बड़ी “ह्यूमन ऑडिट” की तैयारी शुरू। डिजिटल अपडेट्स + फील्ड वेरिफिकेशन दोनों जोर से राज्यों को फंड सपोर्ट। नई टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल का रास्ता साफ।
इतने बड़े बजट में आधा देश पूछेगा— “भाई, गिनती शुरू कब होगी?”
बाकी आधा— “और हम हैं कहाँ इस गिनती में?”
कोयला सेक्टर में बड़ा सुधार—‘कोलसेतु’ नीति को हरी झंडी
कैबिनेट ने कोयला लिंकिंग सुधारते हुए कोलसेतु नाम का नया फ्रेमवर्क मंजूर कर दिया है। इसका मकसद- कोयला सप्लाई को फास्ट, क्लियर और फेयर बनाना। इंडस्ट्री को बिना रुकावट सप्लाई। पारदर्शिता में उछाल। कोयला लिंकिंग में पुरानी उलझनें खत्म।

MSP 2026 सीज़न—नारियल किसानों के लिए राहत पैकेज
कैबिनेट का तीसरा फैसला पूरी तरह किसानों के नाम रहा। कोप्रा 2026 सीज़न के MSP पर नीतिगत अनुमति दे दी गई।
अब इससे- नारियल किसानों की आय स्थिर होगी। मार्केट में MSP का भरोसा रहेगा। दक्षिण भारत के कोस्टल राज्यों को फायदा।
तीन फैसले, एक मैसेज: 2027 की तैयारी अभी से शुरू
कैबिनेट ने ये साफ संदेश दिया है कि डेटा स्ट्रॉन्ग, एनर्जी स्मूद और किसानों की जेब सुरक्षित ये तीनों टारगेट साथ-साथ चलेंगे।
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