
CBSE, ICSE और UP Board की परीक्षाएं जैसे-जैसे नज़दीक आ रही हैं, वैसे-वैसे छात्रों की टेंशन बढ़ती जा रही है।
लेकिन इस बार चुनौती सिर्फ सिलेबस और रिवीजन की नहीं, बल्कि DJ और लाउडस्पीकर के शोर की भी है।
शादी-ब्याह के सीजन में गेस्ट हाउसों, मैरिज लॉन और खुले मैदानों से आ रही तेज आवाज़ें छात्रों की पढ़ाई में सबसे बड़ा डिस्ट्रैक्शन बन गई हैं।
DJ ऑन, Concentration ऑफ!
देर रात तक तेज डीजे, हाई वॉल्यूम लाउडस्पीकर, लगातार “बारात एंट्री” और “डांस फ्लोर बीट” इन सबने घरों को पढ़ाई का नहीं, पार्टी का एक्सटेंशन बना दिया है। किताब खोलते ही दिमाग में जवाब नहीं, बल्कि DJ रिमिक्स घूमने लगता है।
Mental Focus पर सीधा असर
शोर सिर्फ कानों को नहीं, दिमाग को भी थका देता है। लगातार Noise Pollution के कारण एकाग्रता टूट रही है। नींद प्रभावित हो रही है। Anxiety और Stress बढ़ रहा है। परीक्षा से पहले का समय बच्चों के लिए मेंटली सबसे सेंसिटिव फेज़ होता है।
प्रशासन से सख्ती की मांग
प्रशासन से अपील की है कि परीक्षा अवधि के दौरान DJ और लाउडस्पीकर पर समय और वॉल्यूम लिमिट Noise नियमों का सख्ती से पालन किया जाए, ताकि बच्चों को शांत और सुरक्षित माहौल मिल सके।

पढ़ाई का माहौल या बारात का शोर?
एक तरफ सरकार “Exam Warriors” की बात करती है और दूसरी तरफ छात्र DJ Warriors से जूझ रहे हैं। सवाल यही है क्या कुछ हफ्तों की शांति बच्चों के भविष्य से ज्यादा मुश्किल है?
“शादी एक दिन की होती है, लेकिन बोर्ड एग्ज़ाम बच्चों की पूरी ज़िंदगी तय करता है।”
अगर परीक्षा के दौरान थोड़ी सख्ती दिखाई जाए, तो किसी का नुकसान नहीं होगा—बल्कि हजारों छात्रों को राहत मिलेगी।
