
मिडिल ईस्ट इन दिनों बारूद की ढेर पर बैठा है. मिसाइलें, ड्रोन और धमकियों के बीच अचानक आसमान में एक और आवाज़ गूंजी. यह आवाज़ किसी आम फाइटर जेट की नहीं थी. यह थी अमेरिका के रणनीतिक बॉम्बर B-1B Lancer की गूंज.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने हाल ही में एक वीडियो जारी किया. वीडियो में लंबी दूरी तक मार करने वाले B-1B बॉम्बर मिडिल ईस्ट के आसमान में गश्त करते दिखे.
संदेश साफ था. यह सिर्फ उड़ान नहीं थी. यह ताकत का सार्वजनिक प्रदर्शन था.
‘शो ऑफ फोर्स’ या रणनीतिक चेतावनी?
सैन्य विशेषज्ञ इसे साधारण अभ्यास नहीं मान रहे. इस तरह की उड़ानें अक्सर तब होती हैं जब किसी क्षेत्र में तनाव चरम पर हो. पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ा है.इजरायल और अमेरिका ने ईरान से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया. जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों से पलटवार किया.
ऐसे माहौल में जब B-1B जैसे भारी बॉम्बर उड़ते हैं, तो वह सिर्फ आसमान नहीं नापते. वे संदेश लिखते हैं.
और वह संदेश अक्सर बहुत साफ होता है.
B-1B लांसर: हवा में उड़ता ‘आयरन हैमर’
B-1B लांसर को यूं ही अमेरिकी वायुसेना का “आयरन हैमर” नहीं कहा जाता. यह सुपरसोनिक रणनीतिक बॉम्बर दुश्मन के इलाके में गहराई तक जाकर हमला करने के लिए बनाया गया है. इसकी क्षमता सुनकर कई देशों की एयर डिफेंस सिस्टम की धड़कन बढ़ जाती है.
यह विमान लगभग 34,000 किलोग्राम तक हथियार ले जा सकता है. इसके अंदर लंबी दूरी के मिसाइल, प्रिसिशन गाइडेड बम और कई तरह के हथियार फिट किए जा सकते हैं.
सबसे दिलचस्प इसकी variable-sweep wing technology है. यानी पंख उड़ान के दौरान एंगल बदलते हैं. धीरे उड़ना हो तो अलग मोड, तेज़ रफ्तार चाहिए तो अलग.
परिणाम यह कि यह विमान अलग-अलग मिशन में बेहद लचीला साबित होता है.

सहयोगी देशों के साथ अभ्यास
CENTCOM के अनुसार इस मिशन में B-1B बॉम्बर्स ने क्षेत्रीय सहयोगियों के फाइटर जेट्स के साथ संयुक्त अभ्यास भी किया. इस तरह के अभ्यास दो मकसद पूरे करते हैं. पहला, सैन्य समन्वय मजबूत करना. दूसरा, विरोधियों को यह दिखाना कि गठबंधन अभी भी मजबूत है.
सीधे शब्दों में कहें तो यह एक तरह की रणनीतिक फोटो सेशन भी होती है. फर्क बस इतना कि कैमरे के सामने मॉडल नहीं बल्कि मिसाइल ले जाने वाले विमान होते हैं.
बढ़ता तनाव और लंबी दूरी की तैयारी
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका ने सिर्फ B-1B ही नहीं बल्कि B-2 और B-52 जैसे अन्य रणनीतिक बॉम्बर भी तैनात किए हैं. ये विमान लंबी दूरी से हमले करने में सक्षम हैं. खासकर उन ठिकानों पर जो जमीन के नीचे छिपे होते हैं.
यानी अगर हालात और बिगड़ते हैं तो हवा से जवाब देने की पूरी तैयारी पहले से मौजूद है.
असली खेल: युद्ध नहीं, मनोवैज्ञानिक दबाव
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हर मिसाइल दागना जरूरी नहीं होता. कई बार सिर्फ विमान उड़ाना ही काफी होता है. B-1B की उड़ान असल में उसी रणनीति का हिस्सा लगती है. यह युद्ध की घोषणा नहीं है. यह युद्ध से पहले की कूटनीतिक गर्जना है.
आसमान में उड़ती रणनीति
मिडिल ईस्ट में हालात अभी भी नाजुक हैं. और जब आसमान में इतने भारी बॉम्बर घूमने लगें तो यह समझ लेना चाहिए कि दुनिया की सबसे बड़ी ताकतें शतरंज की चालें चल रही हैं. फिलहाल B-1B की उड़ान सिर्फ एक अभ्यास बताई जा रही है.
लेकिन राजनीति और युद्ध की दुनिया में कई बार अभ्यास ही असली संदेश होता है.
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