
उत्तराखंड की शांत वादियों में तीन साल पहले जो चीख गूंजी थी, वह आज भी हवा में तैर रही है। 19 साल की अंकिता भंडारी — एक आम लड़की, बड़े सपने नहीं, बस परिवार का सहारा बनने की चाह। नौकरी मिली ऋषिकेश के एक रिजॉर्ट में, लेकिन वहां उसे मिला वो सिस्टम, जहां “ना” कहना सबसे बड़ा गुनाह बन गया।
सवाल आज भी वही है — क्या यह सिर्फ एक मर्डर था? या फिर सत्ता के साये में दबा दिया गया एक सच?
Christmas, Videos और फिर से खुलते ज़ख्म
वक़्त बीत जाता है, लेकिन कुछ केस कभी पुराने नहीं होते। हाल ही में सामने आया उर्मिला सनावर का वीडियो उसी अधूरे सच को फिर से ज़िंदा कर गया। वीडियो में जिस “VIP” का इशारा किया गया, वही नाम है जो अंकिता ने अपने आख़िरी मैसेज में लिया था।
तीन साल बीत गए, आरोपी जेल में हैं, लेकिन VIP अब भी ‘Unknown Person’ बना हुआ है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड पर जारी सियासी घमासान के बीच उर्मिला राठौड़ का नया वीडियो सामने आया है। उधर, निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर ने वायरल ऑडियो को फर्जी बताते हुए फोरेंसिक जांच की मांग की और ज्वालापुर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई।
“मुझे राजनीति नहीं, इंसाफ चाहिए” — एक मां की सीधी बात
अंकिता की मां सोनी देवी का वायरल वीडियो किसी राजनीतिक बयान जैसा नहीं, बल्कि एक मां की टूटी हुई सांसों जैसा है। वह साफ कहती हैं, “मेरी बेटी ने गलत काम से मना किया, इसलिए उसे मार दिया गया। मुझे हत्यारा चाहिए।”
यह लाइन जितनी सरल है, उतनी ही सिस्टम के लिए असहज। क्योंकि यहां मांग कोई जांच कमेटी नहीं, सिर्फ सच्चाई है। देश में न्याय की सबसे भारी कीमत, अक्सर मांएं ही चुकाती हैं।
सत्ता बनाम सवाल: Video ने क्यों बढ़ाई बेचैनी?
जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, उत्तराखंड की राजनीति में हलचल तेज़ हो गई।
विपक्ष ने दोबारा जांच और CBI Probe की मांग कर दी। सत्तापक्ष ने इसे “राजनीतिक स्टंट” बताया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सीधे CM से सवाल पूछा — अगर सब कुछ साफ है, तो दोबारा जांच से डर कैसा?
उधर BJP का तर्क — “सबूत हैं तो कोर्ट में लाएं।”

जब सिस्टम ही सबूत संभालता हो, तो आम आदमी लाए कहां से?
18 सितंबर 2022: जब अंकिता गायब हुई और सिस्टम चुप रहा
इस केस की कहानी उसी रात से शुरू होती है, जब अंकिता वंतारा रिजॉर्ट से लापता हो जाती है। पांच दिन बाद उसका शव चिल्ला नहर से मिलता है। जांच में सामने आया कि रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य ने एक VIP गेस्ट के लिए ‘Extra Service’ का दबाव बनाया। अंकिता ने साफ इनकार किया और यही इनकार उसकी मौत की वजह बन गया।
आज पुलकित और उसके साथी जेल में हैं। लेकिन कहानी का सबसे अहम किरदार — VIP — अब भी परदे के पीछे है।
VIP कौन? यही सवाल सबसे ज़्यादा चुभता है
इस केस में सबसे बड़ा सवाल किसी आरोपी का नहीं, बल्कि गायब आरोपी का है। जिसके लिए सब कुछ हुआ, जिसके नाम पर दबाव बनाया गया, वह आज भी जांच की फाइलों में सिर्फ “VIP” है।
देश में गरीब का नाम FIR में पूरा लिखा जाता है, और ताकतवर सिर्फ तीन अक्षरों में सिमट जाता है।
केस खत्म हुआ, लेकिन इंसाफ नहीं
अंकिता भंडारी केस आज एक क्राइम स्टोरी नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल। सत्ता की जवाबदेही की परीक्षा और सिस्टम की नैतिकता का आईना बन चुका है। जब तक VIP का नाम सामने नहीं आता, जब तक मां की आंखों से आंसू नहीं सूखते, तब तक यह केस Closed नहीं कहलाएगा।
क्योंकि कुछ चीखें फाइल बंद होने से नहीं, सच सामने आने से शांत होती हैं।
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