
एग्जाम हॉल… जहां पसीना, पेन और प्रेशर का त्रिकोण बनता है। लेकिन अजमेर में इस बार कहानी थोड़ी सिनेमाई निकली। यहां एक छात्र ने सवाल हल करने के बजाय कैमरा ऑन किया… और कुछ ही मिनटों में ‘एग्जाम’ कंटेंट बन गया।
“Reel vs Real”: जब परीक्षा हॉल बना शूटिंग सेट
Ajmer के गोडीयावास में कक्षा 11 का एक छात्र RBSE परीक्षा दे रहा था। या कहें, दे भी रहा था और शूट भी कर रहा था।
छात्र ने परीक्षा के दौरान मोबाइल निकालकर रील बनाई। फ्रेम में आंसर शीट भी थी, बैकग्राउंड में क्लासरूम भी… और सबसे बड़ी बात, सिस्टम भी बेखबर था। यह सिर्फ वीडियो नहीं था, यह सुरक्षा व्यवस्था की लाइव स्ट्रीम थी।
“RBSE की परीक्षा या सोशल मीडिया चैलेंज?”
Rajasthan Board of Secondary Education की परीक्षा में इस तरह का मामला सामने आना कई सवाल खड़े करता है।
मोबाइल अंदर कैसे पहुंचा? निगरानी कहां थी? और सबसे बड़ा सवाल, क्या अब एग्जाम भी ‘कंटेंट क्रिएशन’ का प्लेटफॉर्म बन चुका है?
जब नियम किताबों में रह जाएं और रील्स रूम में, तो शिक्षा का बैलेंस खुद-ब-खुद बिगड़ जाता है।
शिक्षा विशेषज्ञ प्रभाष बहादुर कहते हैं, “आज के छात्र सिर्फ नंबर नहीं, ‘नंबर ऑफ व्यूज़’ के पीछे भाग रहे हैं। सिस्टम ने अनुशासन को इतना हल्का कर दिया है कि एग्जाम हॉल भी अब कंटेंट स्टूडियो लगने लगा है।” उनका तंज शिक्षा व्यवस्था की नस पर सीधा वार करता है।

“वायरल वीडियो, वायरल सवाल”
वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। कुछ लोग इसे ‘हिम्मत’ कह रहे हैं, कुछ ‘मूर्खता’। लेकिन असली मुद्दा लाइक्स या व्यूज़ नहीं है,
मुद्दा है उस भरोसे का, जो परीक्षा प्रणाली पर टिका होता है। अगर वही हिल जाए, तो रिजल्ट सिर्फ मार्कशीट में नहीं, समाज में भी गिरता है।
“डिजिटल पीढ़ी का दुविधा”: पढ़ाई या परफॉर्मेंस?
आज की पीढ़ी एक अजीब मोड़ पर खड़ी है। जहां किताब और कैमरा दोनों साथ चल रहे हैं। लेकिन फर्क यह है, किताब भविष्य बनाती है,
और कैमरा सिर्फ फॉलोअर्स।
इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि जब प्राथमिकताएं उलट जाती हैं, तो परिणाम भी उलझ जाते हैं।
“अब क्या होगा?” कार्रवाई या अगली रील का इंतजार
प्रशासन इस मामले की जांच कर रहा है। संभव है छात्र पर कार्रवाई हो। लेकिन असली सवाल यह है, क्या यह आखिरी घटना है? या फिर अगली परीक्षा में कोई और ‘डायरेक्टर’ तैयार बैठा है?
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