Ajit Pawar Last Wish: ‘NCP एक हो जाए’—परिवार के करीबी का दावा

भोजराज नावानी
भोजराज नावानी

महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों श्रद्धांजलि के साथ रणनीति भी चल रही है। डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद से एक सवाल हर सियासी बैठक में गूंज रहा है— अगला डिप्टी सीएम कौन? क्या NCP फिर एक होगी? और सबसे बड़ा— ‘दादा’ क्या चाहते थे?

अब इन सवालों के बीच पवार परिवार की करीबी सहयोगी किरण गुजर का बयान सामने आया है, जिसने सियासी बाजार की गर्मी और बढ़ा दी है।

अस्थि विसर्जन के बाद बड़ा दावा

30 जनवरी को अजित पवार की अस्थियों का विसर्जन हुआ। इसी दौरान मीडिया से बातचीत में किरण गुजर ने दावा किया कि ‘दादा’ की आख़िरी इच्छा थी कि NCP के दोनों गुटों का विलय हो और पार्टी एकजुट रहे।

उनके मुताबिक, यह सिर्फ एक भावनात्मक इच्छा नहीं थी, बल्कि परिवार के भीतर इस पर गंभीर चर्चा चल रही थी

राजनीति में जहां आख़िरी इच्छा अक्सर पद और वारिस को लेकर होती है, वहां ‘एकता’ का ज़िक्र होना अपने आप में बड़ा संदेश है।

आख़िरी कॉल और कागज़ात का ज़िक्र

किरण गुजर ने यह भी बताया कि अपनी आख़िरी फोन कॉल में अजित पवार ने उनसे चुनाव से जुड़े कुछ कागज़ात मंगवाए थे। संकेत साफ है— भविष्य की तैयारी चल रही थी, और तस्वीर में सिर्फ एक गुट नहीं था।

विलय पर अब भी सस्पेंस क्यों?

हालांकि, अब तक शरद पवार गुट या अजित पवार गुट किसी ने भी औपचारिक रूप से विलय का ऐलान नहीं किया है। बीजेपी की ओर से पहले ही संकेत दिए जा चुके हैं कि NCP कोटे का डिप्टी सीएम पद अजित पवार गुट के पास ही रहेगा, लेकिन ‘दादा’ की कथित इच्छा ने इस गणित को जज़्बात से जोड़ दिया है।

बारामती की बैठक और बदली हवा

बुधवार देर रात अजित पवार को श्रद्धांजलि देने के लिए NCP के वरिष्ठ नेता बारामती पहुंचे थे। सूत्रों के मुताबिक, उस बैठक में सिर्फ शोक नहीं था— राजनीतिक विकल्पों पर भी गंभीर चर्चा हुई।

बताया जा रहा है कि दोनों गुटों का विलय, शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP के सरकार में शामिल होने की दिशा में पहला कदम हो सकता है।

आज महाराष्ट्र की राजनीति एक अजीब मोड़ पर खड़ी है— जहां सत्ता का सवाल ज़िंदा है, लेकिन एकता की विरासत भी दस्तक दे रही है

अब देखना यह है कि ‘दादा’ की आख़िरी इच्छा राजनीतिक फैसला बनती है या सिर्फ भावनात्मक बयान रह जाती है।

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