
महाराष्ट्र की राजनीति उस वक्त सन्न रह गई जब 28 जनवरी की सुबह बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान हुए विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार का असामयिक निधन हो गया। यह महज़ एक दुर्घटना नहीं थी, बल्कि महायुति सरकार के राजनीतिक इंजन को झटका देने वाला पल साबित हुआ।
जिस नेता को सत्ता का सबसे मजबूत पिलर माना जाता था, उनके अचानक चले जाने से अब सरकार के भीतर और बाहर एक ही सवाल गूंज रहा है — अब अगला कौन?
महायुति सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा
2023 में एनसीपी पर निर्णायक पकड़ और 2024 में चुनाव आयोग से पार्टी नाम-चिन्ह हासिल करना… अजित पवार सिर्फ नेता नहीं, बल्कि एक Political Command Centre थे। अब उनके न रहने से डिप्टी सीएम की कुर्सी खाली है और एनसीपी (अजित गुट) दिशा तलाश रही है।
“यह खाली कुर्सी नहीं, खाली कंट्रोल रूम है।”
Sunetra Pawar: Sympathy + Stability Formula?
सबसे आगे नाम है सुनेत्रा पवार का। राज्यसभा सांसद, बारामती की राजनीति में मजबूत पकड़ और पार्टी के भीतर संतुलन साधने की छवि।
मौजूदा भावनात्मक माहौल में सुनेत्रा पवार महायुति के लिए Low-Risk, High-Acceptance विकल्प हो सकती हैं।
सत्ता को स्थिर रखने और सहानुभूति लहर को संभालने के लिए बीजेपी भी इस नाम पर असहज नहीं दिखती।
Parth Pawar: नाम बड़ा, अनुभव अभी अधूरा
अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार पहले से राजनीति में हैं। 2019 का लोकसभा चुनाव भले ही हार गए हों, लेकिन युवा चेहरे के तौर पर उनकी पहचान बनी है।
हालांकि ग्राउंड-लेवल पकड़ और प्रशासनिक अनुभव की कमी उनके रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट है।
सीधी बात — “विरासत है, लेकिन अभी वजन नहीं।”

Jay Pawar: चर्चा में नाम, रेस से दूर
छोटे बेटे जय पवार फिलहाल एक्टिव पॉलिटिक्स से दूरी बनाए हुए हैं। संगठनात्मक सहयोग तक सीमित भूमिका के कारण डिप्टी सीएम की रेस में उनका नाम सिर्फ कयासों तक सिमटा है।
Yugenra Pawar और शरद पवार फैक्टर
इस पूरे खेल में युगेंद्र पवार और शरद पवार गुट को नजरअंदाज करना बड़ी भूल होगी। अजित पवार के न रहने से बारामती का सत्ता संतुलन फिर से हिल सकता है और शरद पवार की रणनीतिक वापसी की अटकलें तेज हो गई हैं।
राजनीति में कहा जाता है — “जहां खाली जगह होती है, वहां चालें खुद चलने लगती हैं।”
डिप्टी सीएम पद पर लिया जाने वाला फैसला सिर्फ एक नियुक्ति नहीं होगा, बल्कि यह तय करेगा कि महायुति सरकार कितनी मजबूत रहेगी। एनसीपी की कमान किस दिशा में जाएगी। और महाराष्ट्र की राजनीति किस मोड़ पर पहुंचेगी
एक हादसे ने कई राजनीतिक दरवाज़े खोल दिए हैं — अब सवाल यह है, कौन अंदर जाएगा?
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