
अफगानिस्तान फिर सुर्खियों में है। तालिबान सरकार ने ऐसे नए कानून लागू किए हैं, जिससे देश में मौलवियों का अपराध करना अब “No Case” बन गया है। हां, सही सुना आपने – चाहे चोरी हो, चाहे झूठा आरोप, मौलवी हमेशा Above the Law होंगे। 58 पन्नों के इस Criminal Procedure Code में गुलाम और मालिक जैसे शब्दों का जिक्र है और मौलवी को अफगान सोसाइटी में सबसे ऊपर रखा गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस कदम को मानवाधिकारों के लिए बड़ा झटका मान रहा है।
गुलामी और मौलवी सर्वोच्चता
नए Criminal Procedure Code में “गुलाम” और “मालिक” जैसे शब्दों का खुला इस्तेमाल किया गया है। अफगान सोसाइटी में मौलवियों को सर्वोच्च दर्जा दिया गया है, जबकि आम आदमी के लिए कानून अब सिर्फ एक शो पीस जैसा है।
मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदजादा की मंजूरी
तालिबान के सुप्रीम लीडर मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने 58 पन्नों के दस्तावेज को हरी झंडी दे दी। कोर्ट में इसके लागू होने के आदेश जारी हो गए। अब अफगानिस्तान में क्लेरिकल immunity आधिकारिक हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय विवाद और आलोचना
मानवाधिकार विशेषज्ञ और विदेशी मीडिया इसे “Religious Elites Above Law” कहकर चौंकाने वाला कदम मान रहे हैं। विरोधियों का कहना है कि यह कानून सीधे तौर पर गुलामी और असमानता को बढ़ावा देता है।

अफगानिस्तान में कानून अब ऐसा बन गया है कि मौलवी कहीं भी, कभी भी, कोई भी गलती करें, “No Problem, No Case”। और बाकी आम आदमी? उन्हें कोर्ट में “Please Wait in Queue” लिखा बोर्ड थमा दिया गया।
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