कन्नौज में 3.5 करोड़ के टेंडर में गड़बड़ी पर कार्रवाई, एक्सईएन सस्पेंड; रिश्वत के आरोप में जेई बर्खास्त

कन्नौज: उत्तर प्रदेश के कन्नौज में विकास कार्यों के लिए करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये के टेंडर आवंटन में कथित अनियमितताओं के मामले में कार्रवाई की गई है। समाज कल्याण विभाग के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण के निर्देश पर यूपी सिडको के अधिशासी अभियंता संजय गंगवार को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, रिश्वत मांगने के आरोपों की विभागीय जांच में दोषी पाए गए आउटसोर्सिंग पर तैनात अवर अभियंता कमल बाबू को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

एक ही ठेकेदार को बार-बार टेंडर देने का आरोप

एकीकृत विकास योजना के तहत जिले में करीब 3.5 करोड़ रुपये के टेंडर आवंटित किए गए थे। इस प्रक्रिया में एक ही ठेकेदार को बार-बार काम देने और अन्य ठेकेदारों को प्रतिस्पर्धा से दूर रखने के आरोप सामने आए। शिकायतकर्ताओं ने टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायत की थी।

यूपी सिडको के प्रबंध निदेशक संजीव कुमार की जांच में टेंडर आवंटन के दौरान नियमों के उल्लंघन की बात सामने आने का दावा किया गया। आरोप है कि स्वीकृत बजट और टेंडर राशि के बीच मामूली अंतर रखा गया और बार-बार एक ही ठेकेदार को काम दिया गया। टेंडर की शर्तें भी कथित तौर पर इस तरह तय की गईं, जिससे संबंधित ठेकेदार को फायदा मिल सके।

रिश्वत मांगने के आरोप में जेई की सेवा समाप्त

मामले में आउटसोर्सिंग पर तैनात अवर अभियंता कमल बाबू के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायतों की विभागीय जांच कराई गई। मंत्री असीम अरुण के मुताबिक, जांच में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद जेई को सेवा से हटा दिया गया। उन्होंने बताया कि संबंधित कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जाएगी।

वहीं, एक ही कंपनी को लगातार टेंडर देने और दूसरी कंपनियों को बोली प्रक्रिया में शामिल होने से रोकने के आरोपों के चलते अधिशासी अभियंता संजय गंगवार को निलंबित किया गया है।

चैट और वॉयस रिकॉर्डिंग की होगी फोरेंसिक जांच

मामले में कुछ ठेकेदारों ने दावा किया है कि उनके पास टेंडर आवंटन से जुड़ी चैट और वॉयस कॉल की रिकॉर्डिंग मौजूद है। आरोप है कि इन माध्यमों के जरिए टेंडर दिलाने के बदले रिश्वत मांगी गई थी। इन दावों की जांच के लिए पुलिस को डिजिटल साक्ष्यों और वॉयस रिकॉर्डिंग की फोरेंसिक जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।

मंत्री असीम अरुण ने कहा कि पूरे मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में शामिल पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। टेंडर प्रक्रिया में पक्षपात और कथित सिंडिकेट के संचालन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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