मराठी नहीं आती तो रोजगार पर संकट? महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए नया नियम, हिंदी भाषियों की बढ़ी चिंता

मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो, टैक्सी और ऐप आधारित कैब चलाने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का सामान्य ज्ञान जरूरी किया जा रहा है। सरकार ने इसके लिए मोटर वाहन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया है। सरकार का कहना है कि यात्रियों से बेहतर बातचीत और उनकी जरूरत समझने के लिए ड्राइवरों को मराठी का कामकाजी ज्ञान होना जरूरी है। वहीं, इस नियम को लेकर गैर-मराठी भाषी, खासकर हिंदी भाषी ड्राइवरों के बीच चिंता बढ़ गई है।

क्या है महाराष्ट्र सरकार का नया नियम?

महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो, टैक्सी और ऐप आधारित कैब चालकों के लिए मराठी के कामकाजी ज्ञान को जरूरी करने का प्रस्ताव रखा है। इसका मतलब यह है कि ड्राइवर को इतनी मराठी आनी चाहिए कि वह यात्री से सामान्य बातचीत कर सके, उसकी बात समझ सके और जरूरी जानकारी दे सके।

सरकार की ओर से इसे मराठी भाषा की उच्च स्तर की जानकारी के तौर पर नहीं बताया गया है। इसमें मुख्य जोर रोजमर्रा के काम में इस्तेमाल होने वाली भाषा को समझने और बोलने पर है।

मराठी नहीं आई तो क्या तुरंत लाइसेंस रद्द होगा?

यह इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल है। नियम का मतलब यह नहीं है कि 15 अगस्त के बाद मराठी नहीं बोल पाने वाले हर ड्राइवर का लाइसेंस उसी दिन रद्द कर दिया जाएगा।

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, अगर किसी चालक में जरूरी मराठी ज्ञान नहीं पाया जाता है तो संबंधित प्राधिकरण उसे नोटिस जारी करेगा और मराठी सीखने के लिए समय देगा। इसके बाद भी नियम का पालन नहीं करने पर ड्राइविंग लाइसेंस को अधिकतम तीन महीने तक निलंबित किया जा सकता है।

अगर निलंबन की अवधि खत्म होने के बाद भी चालक नियम का पालन नहीं करता है तो उसका परमिट रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है। हालांकि कार्रवाई से पहले चालक को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।

सरकार क्यों चाहती है कि ड्राइवर मराठी सीखें?

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक का कहना है कि महाराष्ट्र में सार्वजनिक परिवहन सेवा देने वाले ड्राइवरों को स्थानीय भाषा का कम से कम इतना ज्ञान होना चाहिए कि वे यात्रियों से आसानी से बातचीत कर सकें।

ऑटो और टैक्सी ड्राइवर रोज बड़ी संख्या में यात्रियों के संपर्क में आते हैं। ऐसे में यात्री को किसी जगह की जानकारी चाहिए हो, रास्ता बताना हो या किसी परेशानी के बारे में समझाना हो, तो भाषा की वजह से दिक्कत नहीं होनी चाहिए। सरकार इसी आधार पर मराठी के सामान्य ज्ञान को जरूरी बनाने की बात कह रही है।

हिंदी भाषी ड्राइवरों को क्यों हो रही परेशानी?

महाराष्ट्र में उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में लोग आकर काम करते हैं। मुंबई, ठाणे, पुणे और आसपास के इलाकों में ऑटो और टैक्सी चलाने वाले गैर-मराठी भाषी लोगों की भी बड़ी संख्या है।

इनमें से कई लोग लंबे समय से महाराष्ट्र में रह रहे हैं, लेकिन रोजमर्रा के काम में हिंदी का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में मराठी को परमिट और लाइसेंस से जोड़ने के फैसले ने उनके सामने नई चिंता खड़ी कर दी है।

इन ड्राइवरों को डर है कि अगर वे तय समय में मराठी का जरूरी ज्ञान हासिल नहीं कर पाए तो इसका सीधा असर उनकी रोजी-रोटी पर पड़ सकता है।

क्या यह नियम सिर्फ हिंदी भाषियों पर लागू होगा?

नहीं। यह नियम किसी एक राज्य या भाषा से आने वाले लोगों के लिए अलग से नहीं बनाया गया है। महाराष्ट्र में ऑटो, टैक्सी और ऐप आधारित कैब चलाने वाले उन सभी चालकों पर यह व्यवस्था लागू होगी, जिनके लिए मराठी का कामकाजी ज्ञान अनिवार्य किया गया है।

यानी चालक हिंदी बोलता हो, गुजराती, बंगाली, तेलुगु या किसी अन्य भाषा का हो, महाराष्ट्र में संबंधित सार्वजनिक परिवहन सेवा चलाने पर उसे नियम के अनुसार मराठी का जरूरी ज्ञान हासिल करना होगा।

सरकार ने मराठी सिखाने की भी व्यवस्था की

सरकार की ओर से ड्राइवरों को मराठी सीखने का मौका भी दिया जा रहा है। परिवहन विभाग और संबंधित संस्थाओं की मदद से कई जगहों पर चालकों के लिए मराठी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए गए हैं।

इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ड्राइवरों को रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली मराठी सिखाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वे यात्रियों से सामान्य बातचीत कर सकें और उनकी जरूरत समझ सकें।

भाषा का सम्मान जरूरी, लेकिन रोजगार का सवाल भी अहम

महाराष्ट्र की स्थानीय भाषा मराठी है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए। किसी भी राज्य में रहने वाले व्यक्ति के लिए स्थानीय भाषा सीखना उपयोगी भी होता है। लेकिन इस मामले में बड़ा सवाल यह है कि भाषा की अनिवार्यता को रोजगार से जोड़ते समय कितना संतुलन रखा जाता है।

ऑटो और टैक्सी चलाने वाले ज्यादातर लोग रोज कमाई करके अपना परिवार चलाते हैं। ऐसे में लाइसेंस या परमिट पर कार्रवाई होने से उनकी आमदनी सीधे प्रभावित हो सकती है। इसलिए सरकार के सामने चुनौती यह है कि स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने के साथ कामगारों के हितों का भी ध्यान रखा जाए।

15 अगस्त के बाद क्या होगा?

गैर-मराठी भाषी ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए 15 अगस्त तक का समय दिया गया था। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने साफ कहा है कि इस समयसीमा को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इसके बाद नियम के पालन की जांच और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जा सकती है।

हालांकि, कार्रवाई की प्रक्रिया में पहले नोटिस और सुधार का मौका दिए जाने की बात कही गई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि 15 अगस्त के बाद मराठी नहीं बोल पाने वाले हर ड्राइवर का लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिया जाएगा।

हिंदी भाषी ड्राइवरों के लिए क्या है रास्ता?

महाराष्ट्र में ऑटो, टैक्सी या ऐप आधारित कैब चलाने वाले हिंदी भाषी ड्राइवरों के लिए अब मराठी की सामान्य बातचीत सीखना जरूरी हो सकता है। सरकार की ओर से उपलब्ध प्रशिक्षण में शामिल होकर वे इस नियम को पूरा करने की तैयारी कर सकते हैं।

अब इस पूरे मामले में नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार नियम को किस तरह लागू करती है और मराठी भाषा की शर्त पूरी नहीं करने वाले ड्राइवरों के खिलाफ कार्रवाई में कितनी सख्ती और कितनी व्यावहारिकता बरती जाती है।

 

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