पिछले 12 साल में डिफेंस सेक्टर में कितना बदला भारत? राजनाथ सिंह ने गिनाईं बड़ी उपलब्धियां, रक्षा उत्पादन से निर्यात तक ऐसे बढ़ी ताकत

नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले 12 वर्षों में भारत के रक्षा क्षेत्र में हुए बदलाव और आत्मनिर्भरता की दिशा में हुई प्रगति का ब्योरा दिया है। 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आकाशवाणी के जरिए देश के सैनिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रक्षा क्षेत्र के जरिए सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में 46,000 करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

रक्षा उत्पादन करीब चार गुना बढ़ा

राजनाथ सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब 46,000 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। उन्होंने इसे रक्षा क्षेत्र में हुए बड़े बदलाव का प्रमाण बताया।

रक्षा मंत्री के मुताबिक कुल रक्षा उत्पादन में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य सरकारी क्षेत्र की कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 76 फीसदी रही, जबकि निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 24 फीसदी हो गई है। पिछले वित्त वर्ष में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 22 फीसदी थी। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी रक्षा क्षेत्र में बेहतर होते कारोबारी माहौल को दर्शाती है।

रक्षा निर्यात में 5,500 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी

रक्षा मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2013-14 में भारत का रक्षा निर्यात केवल 686 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये हो गया। उन्होंने बताया कि इस दौरान रक्षा निर्यात में 5,500 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान में भारत में 145 रक्षा निर्यातक हैं और भारतीय रक्षा उत्पाद 80 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत वर्ष 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य हासिल कर लेगा।

रक्षा बजट 2.53 लाख करोड़ से बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये

राजनाथ सिंह ने बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 में देश का रक्षा बजट 2.53 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026-27 में बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया। उन्होंने कहा कि यह भविष्य की रक्षा तकनीकों के प्रति भारत की बढ़ती प्रतिबद्धता को दिखाता है।

इसी अवधि में रक्षा क्षेत्र का पूंजीगत खर्च 94,588 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.19 लाख करोड़ रुपये हो गया। अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में भी बजट बढ़ाया गया है। वित्त वर्ष 2014-15 में रक्षा अनुसंधान एवं विकास का बजट 15,283 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026-27 में 90 फीसदी बढ़कर 29,100 करोड़ रुपये हो गया।

8.75 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रक्षा परियोजनाओं को मंजूरी

रक्षा मंत्री ने बताया कि पिछले एक साल में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 8.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक की रक्षा परियोजनाओं के लिए आवश्यकता की स्वीकृति दी है। उन्होंने कहा कि इससे रक्षा आधुनिकीकरण को लेकर सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट होती है।

उन्होंने रक्षा खरीद प्रक्रिया में किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। फील्ड कमांडरों की वित्तीय शक्तियों की सीमा को दोगुना किया गया है, जिससे उनकी संचालन क्षमता और तेजी से निर्णय लेने की क्षमता बढ़ सके। इसके अलावा राजस्व मार्ग के जरिए 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खरीद को संभव बनाया गया है, जिससे रक्षा उपकरणों के स्वदेशीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

स्वदेशी युद्धपोत और सैन्य प्रणालियों पर जोर

राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भर भारत अभियान में सशस्त्र बलों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वदेशी युद्धपोत, विमान और आधुनिक सैन्य प्रणालियां भारतीय रक्षा बलों की क्षमता को लगातार मजबूत कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल के बीच डीआरडीओ और सशस्त्र बल भविष्य के युद्ध के लिए जरूरी तकनीकों के विकास पर काम कर रहे हैं। उन्होंने पहले टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन सिस्टम के सफल परीक्षण का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक इस प्रणाली में पारंपरिक हथियारों को सटीक निशाना लगाने वाले प्रिसीजन-गाइडेड हथियारों में बदलने की क्षमता है।

MIRV तकनीक वाले अग्नि मिसाइल परीक्षण का भी किया जिक्र

रक्षा मंत्री ने MIRV तकनीक से लैस एडवांस्ड अग्नि मिसाइल के सफल परीक्षण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस परीक्षण ने भारत की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता को एक नया आयाम दिया है।

इसके अलावा उन्होंने लॉन्ग-रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल, RudraM-II एयर-टू-सरफेस मिसाइल, नेवल एंटी-शिप मिसाइल-एसआर और पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट के सफल परीक्षणों का भी जिक्र किया। राजनाथ सिंह के मुताबिक इन परीक्षणों ने देश की मारक क्षमता को मजबूत किया है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सैनिकों का साहस, प्रतिबद्धता और अनुशासन हर नागरिक के लिए प्रेरणा है। देश उनके सेवा, बलिदान और समर्पण के लिए हमेशा ऋणी रहेगा।

 

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