नई दिल्ली: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर बातचीत की जानकारी दी। पीएम मोदी ने जेडी वेंस और उनकी पत्नी को बेटे के जन्म पर बधाई भी दी और पूरे परिवार के लिए शुभकामनाएं दीं।
पीएम मोदी ने एक्स पर दी बातचीत की जानकारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर बताया कि उन्हें अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का फोन आया था। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को अहम क्षेत्रों में और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। पीएम मोदी ने जेडी वेंस और ‘सेकंड लेडी’ को बेटे के जन्म पर गर्मजोशी से बधाई दी।
अमेरिकी सीनेट में रूस और ईरान पर सख्ती वाला विधेयक पास
दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब शुक्रवार को अमेरिकी सीनेट ने दोनों दलों के समर्थन वाला एक विधेयक पारित किया। इस विधेयक के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से तेल और गैस का आयात जारी रखते हैं। भारत और चीन भी ऐसे देशों में शामिल हैं।
इस कदम के पीछे तर्क यह दिया गया है कि रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों का व्यापार मॉस्को की अर्थव्यवस्था को सहारा देता है और यूक्रेन में उसके सैन्य अभियानों के लिए धन जुटाने में मदद करता है।
86-11 वोट से सीनेट ने दी मंजूरी
अमेरिकी सीनेट ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ को 86-11 वोट से मंजूरी दी। यह कानून दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर है, जो इसके प्रमुख निर्माताओं में शामिल थे। कानून का उद्देश्य रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के साथ-साथ उन देशों को निशाना बनाना है, जिनके मॉस्को के साथ बड़े पैमाने पर ऊर्जा व्यापारिक संबंध हैं।
इसके प्रावधानों के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के दुनिया के शीर्ष पांच खरीदारों से आयात होने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है।
रूस की अर्थव्यवस्था और सैन्य अभियान पर दबाव बढ़ाने की तैयारी
विधेयक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, ऊर्जा परियोजनाओं तथा रूस के युद्ध प्रयासों से जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ नए प्रतिबंधों की रूपरेखा भी तैयार की गई है।
इसके अलावा पुराने और झंडा बदलकर इस्तेमाल किए जा रहे तेल टैंकरों पर भी अमेरिकी प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाने का प्रावधान है। ऐसे टैंकरों का इस्तेमाल कथित तौर पर रूस वैश्विक प्रतिबंधों से बचने और ऊर्जा निर्यात से होने वाली कमाई को बनाए रखने के लिए करता है। व्यापक तौर पर इस कानून का उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था और उसके सैन्य अभियान को समर्थन देने वाले वित्तीय प्रवाह को रोकना है।
रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक लग सकता है शुल्क
विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों से आयातित सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने की शक्ति देता है। चीन के साथ भारत भी रूसी कच्चे तेल के दुनिया के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल है।
इस प्रस्ताव के जरिए ऊर्जा आयात करने वाले देशों के सामने विकल्प रखने की कोशिश की गई है कि वे रियायती दरों पर रूसी ऊर्जा खरीदना जारी रखें या अमेरिकी बाजार तक अपनी लाभकारी पहुंच बनाए रखें।
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने बढ़ाई थी रूसी तेल की खरीद
रूस और यूक्रेन के बीच 2022 में संघर्ष शुरू होने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल के बीच भारत ने अपनी राष्ट्रीय ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई थी। ऐसे में अमेरिकी सीनेट में पारित यह विधेयक भारत के लिए भी अहम माना जा रहा है।
