लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने बेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होम स्टे नीति-2025 को अधिक प्रभावी और हितधारकों के लिए सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से इसकी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में संशोधन किया है। नए प्रावधानों के तहत अब होम स्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों में अधिकतम 8 कमरों तक पंजीकरण कराया जा सकेगा। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने मंगलवार को संशोधित व्यवस्था की जानकारी दी।
संशोधित एसओपी के अनुसार, होम स्टे प्रतिष्ठान में न्यूनतम 1 और अधिकतम 8 कमरे पंजीकृत कराए जा सकेंगे। जिन भवनों में 9 या उससे अधिक कमरे होंगे, वे इस नीति के तहत पंजीकरण के पात्र नहीं होंगे। साथ ही, होम स्टे का मालिक या उसका परिवार उसी भवन में निवासरत होना अनिवार्य रहेगा।
बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों के लिए भी बदले नियम
सरकार ने बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों के लिए भी समान व्यवस्था लागू की है। अब इस श्रेणी में भी न्यूनतम 1 और अधिकतम 8 कमरे पंजीकृत कराए जा सकेंगे। इसके अलावा 16 बिस्तरों वाली डारमेट्री को भी इस श्रेणी के अंतर्गत पात्र इकाई माना जाएगा। हालांकि, 9 या उससे अधिक कमरों वाले भवन इस नीति के तहत पंजीकरण नहीं करा सकेंगे।
ऑटो रिन्यूअल की सुविधा भी होगी उपलब्ध
संशोधित व्यवस्था के तहत होम स्टे, ग्रामीण होम स्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों के पंजीकरण प्रमाणपत्र का स्व-नवीनीकरण पर्यटन विभाग के पोर्टल के माध्यम से आवेदक स्वयं कर सकेगा। यह प्रक्रिया पंजीकरण की वैधता समाप्त होने की तिथि से तीन माह पहले शुरू की जा सकेगी।
यदि निर्धारित समय के भीतर स्व-नवीनीकरण नहीं कराया जाता है, तो उसकी स्वीकृति जिला स्तरीय समिति के विवेक पर निर्भर करेगी। इसके लिए आवेदक को विलंब का पर्याप्त और उचित कारण प्रस्तुत करना होगा।
पहले क्या थी व्यवस्था?
इससे पहले जारी एसओपी के अनुसार होम स्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों में अधिकतम 6 कमरे ही पंजीकृत किए जा सकते थे। वहीं, बेड एंड ब्रेकफास्ट श्रेणी में 12 बिस्तरों वाली डारमेट्री को पात्र इकाई माना जाता था। अब संशोधन के बाद कमरों की सीमा बढ़ाकर 8 कर दी गई है और डारमेट्री की क्षमता भी बढ़ाकर 16 बिस्तर कर दी गई है।
पर्यटन को बढ़ावा देने पर सरकार का जोर
सरकार का मानना है कि एसओपी में किए गए इन संशोधनों से प्रदेश में होम स्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों को अधिक सुविधा मिलेगी और राज्य में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
