बंगाल में ‘ऑपरेशन क्राउन प्रिंस’ से सियासी भूचाल, 15 साल बाद सत्ता में रही टीएमसी में एक महीने में कैसे आई टूट?

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी में शुरू हुआ अंदरूनी असंतोष अब खुली बगावत में बदल गया है। ‘ऑपरेशन क्राउन प्रिंस’ के नाम से सामने आई इस राजनीतिक हलचल ने 15 साल तक सत्ता में रही टीएमसी को गहरे संकट में डाल दिया है।

दिल्ली से शुरू हुई हलचल, कोलकाता तक पहुंचा असर

सूत्रों के मुताबिक इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत कोलकाता से नहीं बल्कि दिल्ली से हुई। 22 मई को बंग भवन में तृणमूल के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी और एक वरिष्ठ नेता के बीच हुई मुलाकात के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलने लगे। इस मुलाकात को भले ही संयोग बताया गया हो, लेकिन इसके बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा।

पार्टी में 58 विधायकों के अलग गुट का दावा

इसके बाद हालात तब और गंभीर हो गए जब तृणमूल कांग्रेस के 58 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अलग गुट बनाने का दावा किया। इस गुट को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मान्यता दिए जाने के बाद पार्टी में विभाजन की स्थिति और स्पष्ट हो गई। इसी दौरान ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता चुने जाने की भी चर्चा सामने आई।

हार के बाद बढ़ा असंतोष, नेतृत्व पर उठे सवाल

4 मई को विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद से ही पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ने लगा था। संगठन और निर्णय प्रक्रिया में अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे, जिसके चलते कार्यकर्ताओं और विधायकों के बीच नाराजगी गहराती चली गई।

बैठकों में खुलकर सामने आई नाराजगी

6 मई को हुई नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में भी असंतोष के संकेत साफ नजर आए। कई विधायकों ने पार्टी में एक परिवार के प्रभाव को लेकर असहमति जताई। इसके बाद 19 मई की बैठक में ऋतब्रत बनर्जी और अन्य विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठाए, जिससे अंदरूनी मतभेद और गहरे हो गए।

दिल्ली की मुलाकात के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

22 मई की दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद हालात तेजी से बदले। इसके बाद 25 मई को दस्तावेजों में कथित फर्जी हस्ताक्षर के आरोप सामने आए, जिसने पार्टी विवाद को और भड़का दिया। 27 मई को विधायकों द्वारा इस मामले की शिकायत विधानसभा अध्यक्ष से की गई, जिसके बाद जांच शुरू हो गई।

अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद बढ़ा तनाव

30 मई को अभिषेक बनर्जी के दौरे के दौरान हुए कथित हमले ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया। इसके अगले ही दिन ममता बनर्जी की बैठक में कम विधायकों की मौजूदगी ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी।

‘ऑपरेशन क्राउन प्रिंस’ से खुली बगावत

इसी बीच बागी विधायकों ने ‘ऑपरेशन क्राउन प्रिंस’ नाम से अभियान शुरू कर दिया। 58 विधायकों के अलग गुट के दावे और विधानसभा अध्यक्ष की मान्यता के बाद टीएमसी में विभाजन की स्थिति और गहरी हो गई। वहीं दूसरी ओर राजनीतिक घटनाक्रम तेज़ी से बदलता रहा और दिल्ली से शुरू हुई यह सियासी हलचल कोलकाता विधानसभा तक पहुंच गई।

पार्टी के लिए बड़ा संकट

कुल मिलाकर, 15 साल तक सत्ता में रहने वाली तृणमूल कांग्रेस के लिए यह एक महीने का घटनाक्रम गंभीर राजनीतिक संकट के रूप में सामने आया है, जिसने राज्य की सियासत में नए समीकरण खड़े कर दिए हैं।

 

Related posts