
अमेरिका की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of the United States ने एक ऐतिहासिक फैसले में साफ कर दिया कि टैरिफ दरअसल टैक्स की ही श्रेणी में आते हैं और टैक्स लगाने का अधिकार संविधान के अनुसार सिर्फ कांग्रेस को है, राष्ट्रपति को नहीं।
यह फैसला सीधे तौर पर Donald Trump के उस तर्क पर ब्रेक है जिसमें उन्होंने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट यानी IEEPA के तहत आपातकालीन शक्तियों का हवाला दिया था।
कोर्ट का संदेश सीधा था इमरजेंसी पावर, इकोनॉमिक ब्लैंक चेक नहीं है।
‘Separation of Powers’ की असली परीक्षा
अमेरिकी लोकतंत्र तीन स्तंभों पर टिका है कांग्रेस कानून बनाएगी। राष्ट्रपति उन्हें लागू करेंगे। न्यायपालिका देखेगी कि सब कुछ संविधान की सीमा में है। इसे ही ‘Separation of Powers’ कहा जाता है।
कोर्ट ने अपने फैसले में ‘Major Questions Doctrine’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन फैसलों का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, उनके लिए साफ-साफ संसदीय अनुमति जरूरी है।
मतलब यह कि व्हाइट हाउस से निकला हर आर्थिक फरमान संविधान की चेकपोस्ट से गुजरेगा।
IEEPA का दायरा और अदालत की आपत्ति
प्रशासन ने दलील दी थी कि IEEPA के तहत राष्ट्रीय आपात स्थिति में व्यापारिक प्रतिबंध और टैरिफ लगाए जा सकते हैं। लेकिन अदालत ने माना कि “आपातकाल” का दायरा अनंत नहीं हो सकता। शांति काल में व्यापक आर्थिक नीति लागू करना, वह भी बिना कांग्रेस की मंजूरी, संविधान के ढांचे से मेल नहीं खाता।
यह फैसला केवल एक नीति पर नहीं, बल्कि कार्यपालिका की सीमाओं पर टिप्पणी है।
अगर राष्ट्रपति आदेश न मानें तो?
सैद्धांतिक रूप से सुप्रीम कोर्ट के पास सेना नहीं होती, पर उसके आदेशों की वैधता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। अगर राष्ट्रपति उसी कानूनी आधार पर दोबारा टैरिफ लगाने की कोशिश करते हैं जिसे अदालत असंवैधानिक बता चुकी है, तो यह सीधे-सीधे संविधान की अवमानना मानी जाएगी।

अमेरिकी व्यवस्था में कोर्ट के ऊपर कोई नहीं खड़ा होता, यहां तक कि राष्ट्रपति भी नहीं।
संवैधानिक संकट और महाभियोग की तलवार
ऐसी स्थिति में गेंद कांग्रेस के पाले में आ जाती है। यदि राष्ट्रपति खुलेआम फैसले की अनदेखी करते हैं, तो महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। महाभियोग आसान रास्ता नहीं है, पर संवैधानिक संकट की स्थिति में यह एक वैधानिक विकल्प है।
राष्ट्रपति के पास अब व्यावहारिक रूप से दो ही रास्ते हैं कांग्रेस से स्पष्ट कानून पारित करवाना, व्यापार नीति के अन्य कानूनी विकल्प तलाशना।
आर्थिक नीति या राजनीतिक संदेश?
यह फैसला सिर्फ कानूनी नहीं, राजनीतिक भी है। टैरिफ अक्सर घरेलू उद्योगों की रक्षा के नाम पर लगाए जाते हैं, लेकिन उनका असर वैश्विक सप्लाई चेन और उपभोक्ता कीमतों पर पड़ता है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि इतने बड़े आर्थिक फैसले किसी एक हस्ताक्षर से तय नहीं होंगे।
संविधान यहां सिर्फ किताब नहीं, ब्रेक सिस्टम भी है।
अमेरिका में कानून की अंतिम मुहर
यह निर्णय बताता है कि अमेरिकी लोकतंत्र में संस्थागत संतुलन अभी भी जीवित है। राष्ट्रपति शक्तिशाली हो सकते हैं, पर असीमित नहीं। आपातकालीन शक्तियां व्यापक हो सकती हैं, पर अनंत नहीं। और सबसे ऊपर, संविधान कोई सजावटी दस्तावेज नहीं, बल्कि सत्ता का अंतिम रेफरी है।
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