राज्यसभा रण: बाहर विपक्ष, अंदर सहयोगी… असली पेंच गठबंधन में

Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

उच्च सदन की 37 सीटों पर चुनाव की तारीख तय होते ही दिल्ली से लेकर पटना और मुंबई तक सियासी कैलकुलेटर ऑन हो चुके हैं। 16 मार्च को मतदान होगा, लेकिन असली मुकाबला सिर्फ सत्ता बनाम विपक्ष नहीं है बल्कि गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे की शतरंज भी है।

इन 37 सीटों में फिलहाल 25 सीटें INDIA ब्लॉक के पास हैं और 12 NDA के खाते में। ऐसे में NDA के लिए यह “गणित सुधारने” का मौका है, लेकिन समीकरण इतने सीधे नहीं हैं।

बड़े नामों की विदाई, नई एंट्री की तैयारी

कई दिग्गजों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में बड़े राजनीतिक चेहरे इस बार राज्यसभा से बाहर होंगे। इससे पार्टियों के सामने दोहरी चुनौती है एक तरफ अनुभव को रिप्लेस करना और दूसरी तरफ नए समीकरण साधना।

बिहार: नंबर गेम या नर्व गेम?

बिहार में पांच सीटों पर चुनाव होना है। NDA के पास बहुमत के करीब आंकड़ा है, लेकिन सभी सीटें जीतने के लिए कुछ वोटों की कमी है।

सीट बंटवारे का फॉर्मूला लगभग तय माना जा रहा है, दो सीटें बीजेपी, दो जेडीयू और एक सहयोगी दल को। लेकिन यही सहयोगी कौन होगा? यही असली ट्विस्ट है।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा सब लाइन में हैं। यहां विपक्ष से ज्यादा NDA की अंदरूनी केमिस्ट्री की परीक्षा है।

महाराष्ट्र: गणित आसान, राजनीति मुश्किल

महाराष्ट्र में सात सीटें खाली हैं। कागज पर महायुति छह सीटें आसानी से जीत सकती है, लेकिन शिवसेना (शिंदे गुट), बीजेपी और अन्य सहयोगियों के बीच सीटों का संतुलन बड़ा सवाल है।

अगर टिकट बंटवारे में असंतोष बढ़ा, तो क्रॉस-वोटिंग का खतरा भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यहां चुनाव सिर्फ विपक्ष को हराने का नहीं, बल्कि “अपनों को मनाने” का है।

दक्षिण और पूर्व का समीकरण

तमिलनाडु में डीएमके बढ़त में दिख रही है, जबकि एक सीट पर मुकाबला रोचक हो सकता है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ बनाए रखने की स्थिति में है, लेकिन वाम दल की सीट पर संकट मंडरा सकता है।

ओडिशा, असम, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी समीकरण बदलते दिख रहे हैं। कुछ जगह सत्ता पक्ष को फायदा, तो कहीं विपक्ष को हल्की बढ़त।

कुल मिलाकर क्या तस्वीर?

NDA को 2–3 सीटों का फायदा मिल सकता है, जबकि INDIA ब्लॉक को कुछ सीटों का नुकसान। लेकिन असली सवाल यही है क्या बीजेपी अपने सहयोगियों की महत्वाकांक्षाओं को संतुलित रख पाएगी?

अगर हां, तो राज्यसभा में बढ़त पक्की। अगर नहीं, तो यह चुनाव विपक्ष से पहले गठबंधन की एकता की परीक्षा बन सकता है।

राज्यसभा चुनाव इस बार “बाहर की लड़ाई” से ज्यादा “अंदर की कशमकश” है। सार्वजनिक मंच पर एकता, अंदर कमरे में कैलकुलेटर। यह चुनाव बताएगा कि गठबंधन सिर्फ मंच की फोटो है या असली राजनीतिक केमिस्ट्री।

37 सीटों का यह चुनाव संसद की औपचारिक प्रक्रिया भर नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत का बैरोमीटर है। 16 मार्च को सिर्फ वोट नहीं पड़ेंगे गठबंधन की मजबूती, नेतृत्व की पकड़ और भविष्य की रणनीति पर भी मुहर लगेगी।

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