अब AI बोलेगा – ‘मैं नकली हूं!’ वरना 3 घंटे में उड़ जाएगा अकाउंट

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

डिजिटल दुनिया में “जो दिखता है वही बिकता है” वाली लाइन अब बदलने वाली है। केंद्र सरकार ने 20 फरवरी से नए आईटी नियम लागू कर दिए हैं, जिनके तहत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए फोटो, वीडियो या ऑडियो पर साफ लेबल लगाना अनिवार्य होगा।

सरल शब्दों में कहें तो अगर कंटेंट AI से बना है, तो बताना पड़ेगा। वरना अकाउंट पर कार्रवाई तय है।

क्या हैं नए IT Rules?

सरकार ने सूचना-प्रौद्योगिकी कानून, 2000 की धारा 87 के तहत नियमों में संशोधन किया है।

अब क्या बदला?

AI से बने कंटेंट पर स्पष्ट लेबलिंग अनिवार्य। मेटाडाटा से छेड़छाड़ पूरी तरह प्रतिबंधित। आपत्तिजनक कंटेंट को 3 घंटे में हटाना जरूरी। न्यूडिटी या Deepfake अश्लील सामग्री को 2 घंटे में हटाना होगा। नियम तोड़ने पर अकाउंट सस्पेंड + आपराधिक कार्रवाई संभव। प्लेटफॉर्म की “सेफ हार्बर” सुरक्षा (धारा 79) खत्म हो सकती है। यानि अब “अपलोड करके भूल जाओ” वाला दौर खत्म।

यूजर्स की नई जिम्मेदारी ‘पहले सोचो, फिर पोस्ट करो’

अब सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने की पहली जिम्मेदारी यूजर की होगी। जब भी कोई कंटेंट अपलोड किया जाएगा, यूजर को यह घोषणा करनी होगी कि वह AI से बना है या नहीं। अगर किसी ने जानबूझकर गलत जानकारी दी या लेबल हटाया तो सीधी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

डिजिटल दुनिया में अब “मैंने तो बस शेयर किया था” वाली सफाई काम नहीं आएगी।

3 घंटे की डेडलाइन: प्लेटफॉर्म पर भी दबाव

पहले सोशल मीडिया कंपनियों को आपत्तिजनक सामग्री हटाने के लिए 36 घंटे मिलते थे। अब यह समय घटाकर सिर्फ 3 घंटे कर दिया गया है। Deepfake और अश्लील सामग्री के मामले में तो 2 घंटे का अल्टीमेटम है। सरकार ने कंपनियों से AI आधारित फिल्टर लगाने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि बाल यौन शोषण और डीपफेक जैसे अपराध रोके जा सकें।

AI की आज़ादी पर ‘रेगुलेशन का ताला’

अब तक AI से बनी तस्वीरें और वीडियो बिना किसी पहचान के वायरल हो जाती थीं। लेकिन अब हर AI पोस्ट को जैसे “आईडी कार्ड” दिखाना होगा। डिजिटल क्रिएटर्स के लिए यह पारदर्शिता का नया युग है और फेक कंटेंट बनाने वालों के लिए मुश्किलों का।

जरूरी थे ये नियम?

Deepfake वीडियो, मॉर्फ्ड तस्वीरें और एडिटेड ऑडियो के जरिए गलत जानकारी फैलाने के मामलों में तेजी आई थी। सरकार का तर्क है कि डिजिटल स्पेस में भरोसा बनाए रखने के लिए जवाबदेही जरूरी है। इन नियमों से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट की विश्वसनीयता बढ़ाने की कोशिश की गई है।

AI अब सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। नए IT Rules ने साफ कर दिया है कि डिजिटल आज़ादी के साथ जवाबदेही भी जरूरी है। अब सवाल यह नहीं कि “कंटेंट वायरल होगा या नहीं”, बल्कि यह है कि “कंटेंट लीगल है या नहीं?”

“कचरे पर करारा वार: सदन में Garbage से ज्यादा Politics की बदबू!”

Related posts

Leave a Comment