
अमेरिका की राजधानी Washington, D.C. में गाजा बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक आयोजित हुई। यह अहम बैठक United States Institute of Peace में हुई, जिसकी अध्यक्षता अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने की।
करीब 50 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जबकि 12 देशों ने बतौर ऑब्जर्वर बैठक में भागीदारी की। भारत भी ऑब्जर्वर के रूप में शामिल रहा।
भारत की भूमिका: Observer लेकिन सक्रिय संवाद
अमेरिका में भारत के चार्ज डी अफेयर्स Namgya C. Khampa ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि बैठक के दौरान उनकी बातचीत भारतीय प्रधानमंत्री Narendra Modi से भी हुई।
India ने औपचारिक रूप से ऑब्जर्वर की भूमिका निभाई, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय संवाद बनाए रखा।
ट्रंप का दावा: “जंग खत्म होने की कगार पर”
बैठक के दौरान ट्रंप ने Gaza Strip में जारी संघर्ष को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि इजरायल और हमास के बीच संघर्ष लगभग समाप्ति की ओर है, “बस कुछ चिंगारियां बाकी हैं।”
हालांकि Ground Reality पर हालात कितने बदले हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
Gaza के लिए 7 बड़े ऐलान
मीटिंग में गाजा के पुनर्निर्माण और शांति स्थापना को लेकर कई घोषणाएं हुईं। 9 सदस्य देशों ने लगभग 7 अरब डॉलर (63 हजार करोड़ रुपये) देने का वादा किया। अमेरिका ने खुद 10 अरब डॉलर (करीब 90 हजार करोड़ रुपये) की सहायता का ऐलान किया। 5 देशों ने गाजा में सैन्य तैनाती की घोषणा की। Indonesia ने 8000 से अधिक सैनिक भेजने की बात कही। Kazakhstan ने सैन्य बल तैनात करने की पुष्टि की। United Nations ने 2 अरब डॉलर मानवीय सहायता के लिए घोषित किए। FIFA ने फुटबॉल प्रोजेक्ट्स के लिए 7.5 करोड़ डॉलर खर्च करने की योजना बताई।

Peace, Politics और Power Play
Global Diplomacy में Peace Talks अक्सर Chessboard की तरह होती हैं हर चाल सोच-समझकर चली जाती है। एक तरफ Reconstruction Funding है, दूसरी तरफ Military Deployment। सवाल यही है कि क्या Economic Aid और Security Presence मिलकर स्थायी शांति ला पाएंगे?
Peace Plan का Blueprint तैयार है, लेकिन असली परीक्षा Ground Implementation की होगी।
भरोसा और बड़ा?
$17 Billion से ज्यादा के वादों के बीच सबसे बड़ा सवाल है क्या यह Funding Headlines से आगे बढ़कर Homes, Schools और Hospitals में बदल पाएगी?
क्योंकि History गवाह है, Peace Conferences अक्सर Cameras के सामने जीत जाती हैं, असली जीत जमीन पर तय होती है।
तेहरान में धमाके, Middle East में ‘War Mode’ ऑन?
