कैंपस में विचारों की टक्कर: भागवत का भाषण, NSUI का ‘Go Back’ संस्करण

महेंद्र सिंह
महेंद्र सिंह

Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत संघ प्रमुख Mohan Bhagwat मंगलवार को Lucknow University पहुंचे।

कार्यक्रम को लेकर परिसर में व्यापक सुरक्षा इंतज़ाम किए गए थे। मुख्य द्वार से सभागार तक पुलिस बल तैनात रहा और प्रवेश पर सख्त निगरानी रखी गई।

समारोह में क्या कहा संघ प्रमुख ने?

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने संगठन के 100 वर्षों की यात्रा, राष्ट्र निर्माण में भूमिका और युवाओं की जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थान सकारात्मक विचार-विमर्श के केंद्र होने चाहिए और राष्ट्र की प्रगति में युवाओं की भागीदारी निर्णायक होती है।

शताब्दी समारोह में शिक्षक, विद्यार्थी और संघ से जुड़े पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कैंपस में विरोध: “GO BACK” के नारे

कार्यक्रम की जानकारी मिलते ही National Students’ Union of India (NSUI) से जुड़े छात्र परिसर में एकत्र हुए। उन्होंने कार्यक्रम स्थल के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए “GO BACK” के नारे लगाए।

प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि विश्वविद्यालय एक शैक्षणिक मंच है, और यहां वैचारिक या राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर पुनर्विचार होना चाहिए।

कैंपस जहां बहस होनी चाहिए, वहीं बहस अब बैरिकेड्स के दोनों ओर खड़ी दिखाई दी।

कुछ देर तनाव, फिर नियंत्रण

विरोध के दौरान मुख्य द्वार के पास कुछ समय के लिए अफरातफरी की स्थिति बनी। हालांकि, पुलिस और प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित कर लिया। एहतियातन कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं हुई और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रही।

शैक्षणिक परिसर या वैचारिक मंच?

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विश्वविद्यालय केवल अकादमिक गतिविधियों का केंद्र हैं या विचारधारात्मक संवाद के भी मंच?

एक पक्ष इसे ऐतिहासिक अवसर बता रहा है, दूसरा इसे कैंपस की तटस्थता पर प्रश्न मान रहा है।

सच यही है लोकतंत्र में असहमति भी उतनी ही वास्तविक है जितनी सहमति।

कड़ी सुरक्षा के बीच कार्यक्रम संपन्न हुआ और संघ प्रमुख रवाना हो गए। फिलहाल परिसर में स्थिति सामान्य बताई जा रही है। लेकिन यह घटनाक्रम बताता है कि 2027 के राजनीतिक माहौल से पहले ही कैंपस की राजनीति गरमाने लगी है। कैंपस की दीवारों ने एक बार फिर साबित किया विचार जब टकराते हैं, तो आवाज़ें तेज़ हो जाती हैं।

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