
14 फरवरी 2019 को Pulwama में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। CRPF के 40 जवानों की शहादत ने न केवल राष्ट्रीय भावना को उद्वेलित किया, बल्कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को कई बड़े फैसले लेने के लिए प्रेरित किया।
सवाल यह है इतने साल बाद क्या वास्तव में कुछ बदला?
Balakot Airstrike: नई रणनीतिक नीति का संकेत
हमले के 12 दिन बाद भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक की। यह कदम केवल सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि एक नई “Proactive Policy” का संकेत था कि आतंक के खिलाफ जवाब सीमाओं के पार भी दिया जा सकता है।
इसने भारत की रक्षा नीति में एक स्पष्ट बदलाव दिखाया।
सुरक्षा ढांचे में सुधार
Pulwama के बाद हाईवे मूवमेंट प्रोटोकॉल में बदलाव हुए। काफिलों की आवाजाही, स्थानीय इंटेलिजेंस समन्वय और विस्फोटक पहचान तंत्र को अधिक सख्त किया गया। CRPF और अन्य सुरक्षा बलों को आधुनिक उपकरण, surveillance technology और armored vehicles की संख्या बढ़ाई गई।
नीति और कूटनीति में बदलाव
भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ अपनी आवाज़ और मजबूत की। United Nations समेत कई वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों को लेकर दबाव बनाया गया।

इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति में बदलाव (Article 370 हटाने का निर्णय) को भी कई विश्लेषक Pulwama के बाद की व्यापक रणनीति से जोड़कर देखते हैं।
आर्थिक और कूटनीतिक दबाव
Most Favoured Nation (MFN) का दर्जा वापस लेना और कस्टम ड्यूटी बढ़ाना ये आर्थिक कदम भी उसी क्रम का हिस्सा थे। यह संदेश साफ था: आतंकवाद और व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते।
राष्ट्रीय मनोविज्ञान में बदलाव
Pulwama के बाद देश में राष्ट्रवाद की भावना और अधिक मुखर हुई। सोशल मीडिया से लेकर चुनावी भाषणों तक, “राष्ट्रीय सुरक्षा” एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन गया। लोगों में सेना के प्रति सम्मान और समर्थन की भावना और मजबूत हुई।
क्या चुनौतियाँ अब भी बाकी हैं?
हालांकि कई सुधार हुए, लेकिन आतंकी खतरे पूरी तरह समाप्त नहीं हुए। सीमा पार घुसपैठ, ड्रोन के जरिए हथियार भेजने की घटनाएं और साइबर आतंकवाद जैसी नई चुनौतियां सामने आई हैं। यानी सुरक्षा का यह सफर लगातार evolving है।
Pulwama Attack केवल एक त्रासदी नहीं, बल्कि एक turning point साबित हुआ। इसने भारत की सैन्य, कूटनीतिक और आंतरिक सुरक्षा नीति को अधिक assertive बनाया। लेकिन असली बदलाव केवल नीति में नहीं, बल्कि उस collective resolve में है कि देश अपने शहीदों की कुर्बानी को व्यर्थ नहीं जाने देगा।
